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पंजाब विधानसभा ने बार-बार पेपर लीक होने के खिलाफ प्रस्ताव पास किया

 

चंडीगढ़, 3 अगस्त (आईएएनएस)। पंजाब विधानसभा ने सोमवार को देश भर में बार-बार पेपर लीक होने के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया। यह प्रस्ताव ध्वनि मत से पास किया गया।

प्रस्ताव पर बहस खत्म होने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में बार-बार पेपर लीक होने से करोड़ों छात्रों की उम्मीदें टूट गई हैं, जबकि न्याय मांगने वालों को जवाबदेही के बजाय आंसू गैस के गोले, पैलेट गन और पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस निंदा प्रस्ताव को प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी और केंद्र से पेपर लीक रोकने और देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए कड़े कदम उठाने का आग्रह करेगी।

हालांकि, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने प्रस्ताव पर बहस के दौरान सदन से वॉकआउट किया।

सदन में सीएम मान ने कहा कि जो लोग देश को 'विश्वगुरु' बनाने का दावा करते रहे हैं, उन्होंने देश भर में बार-बार पेपर लीक को रोकने में नाकाम रहकर शिक्षा व्यवस्था का मजाक बना दिया है। पेपर लीक, या दूसरे शब्दों में कहें तो परीक्षा के पेपर बेचना, उम्मीदवारों के सपनों को चकनाचूर कर देता है।

इसका एक उदाहरण यह है कि नीट परीक्षा के 22 उम्मीदवारों ने आत्महत्या कर ली। 2014 में जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तब से देश में 93 बार पेपर लीक हुए हैं।

उन्होंने कहा कि 2019 और 2024 के बीच ऐसे पेपर लीक की संख्या 65 थी, और इनमें से ज्यादातर मामले राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भाजपा की सरकारों के दौरान हुए।

छात्रों के साथ किए गए बर्ताव पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि ये नेता अपने निजी राजनीतिक फायदे के लिए स्कूल का सिलेबस बदल रहे हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के छात्रों ने प्रधानमंत्री को उस केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर किया जो देश में पेपर लीक को रोकने में नाकाम रहे थे।

छात्रों के खिलाफ आंसू गैस, बेरहम पुलिस बल, पैलेट गन और दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करने में केंद्र सरकार की मनमानी अफसोजनक है।

इस मुद्दे पर आगे बात करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि दुनिया भर में पैलेट गन पर रोक है, लेकिन केंद्र सरकार ने बेगुनाह छात्रों के खिलाफ बेरहमी से इनका इस्तेमाल किया है। निष्पक्ष तरीके से परीक्षा कराने का वादा करने के बजाय, प्रधानमंत्री लोगों को गुमराह करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का वादा कर रहे हैं। यह सिस्टम का मजाक है कि केंद्र सरकार परीक्षा को सुचारू रूप से कराने के लिए रक्षा सेवाओं की मदद ले रही है।

जांच के बावजूद बार-बार हो रहे पेपर लीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन पेपर लीक से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं। हर बार सीबीआई जांच के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन किसी को सजा नहीं मिलती। यह बस एक औपचारिकता बनकर रह गया है। अभी भी प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि मामले का फैसला फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगा। इसका मतलब है कि पेपर लीक होते रहेंगे और मामलों का फैसला बाद में होगा।

--आईएएनएस

एमएस/