गुजरात पुलिस ने 10.36 करोड़ रुपए के निवेश धोखाधड़ी मामले में कपल को किया गिरफ्तार
अहमदाबाद, 17 जून (आईएएनएस)। गुजरात में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने एक कपल को गिरफ्तार किया। कपल पर आरोप है कि उन्होंने शेयर मार्केट में निवेश की एक फर्जी स्कीम, डिजिटल सिग्नेचर के गलत इस्तेमाल और जाली फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स के जरिए एक शख्स और उसके रिश्तेदारों से 10.36 करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी की है।
आरोपियों की पहचान जैवलिन उर्फ जय नायक (32) और उसकी पत्नी बोस्की (34) के तौर पर हुई है। पेशे से दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और गांधीनगर के सरगासन इलाके में रहते हैं।
पुलिस के मुताबिक, वे शिकायतकर्ता और धोखाधड़ी के शिकार हुए कौशलकुमार नायक के करीबी रिश्तेदार हैं और उन्होंने कथित तौर पर इसी भरोसे का फायदा उठाकर धोखाधड़ी की।
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता को अधिक रिटर्न का भरोसा दिलाकर कथित लॉन्ग-टर्म शेयर मार्केट स्कीम में निवेश करने के लिए मनाया गया था।
2022 और 2025 के बीच आरोपियों ने कथित तौर पर उनके बैंक अकाउंट की जानकारी हासिल कर ली और उनके अकाउंट से कुल 5,91,91,448 रुपए ट्रांसफर करवाए।
इसके अलावा, अधिक रिटर्न का वादा करके शिकायतकर्ता के जरिए उसके रिश्तेदारों के पैसे भी ट्रांसफर किए गए, जिनकी कुल रकम 4,44,24,068 रुपए थी। आरोपी के कंट्रोल वाले कई अकाउंट्स में कथित तौर पर ट्रांसफर की गई कुल रकम 10,36,15,516 रुपए है।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के डिजिटल सिग्नेचर और पहचान पत्रों (जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड, राशन कार्ड, ई-सिग्नेचर, बिजली और टैक्स बिल, और परिवार की प्रॉपर्टी के कागजात) का गलत इस्तेमाल करके नकली कंपनियां बनाईं और बैंक खाते खोले।
आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता और अधिकारियों को गुमराह करने के लिए नकली फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स भी दिखाए। एक अधिकारी ने बताया, "इनमें नकली स्टैम्प और लेटरहेड का इस्तेमाल करके बनाया गया, आईसीआईसीआई बैंक का एक नकली सर्टिफिकेट शामिल था, जिसमें 90,21,73,737 रुपए का बैलेंस दिखाया गया था। साथ ही, एक नकली ट्रांजैक्शन स्लिप भी थी, जिसमें 50 लाख रुपए क्रेडिट होने का दावा किया गया था।"
इसके अलावा, 'हमिदराजा' और एंजेल ब्रोकिंग के नाम से फर्जी ईमेल भेजे जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें एंजेल वन खाते से 2.25 करोड़ रुपए की निकासी का झूठा दावा किया गया था। आरोप है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को इन्फोटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी में शामिल किया और उन्हें निदेशक (डायरेक्टर) के रूप में नियुक्त किया।
एक करंट अकाउंट यस बैंक में भी खोला गया और आरोप है कि शिकायतकर्ता के डिजिटल सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल कर कई कंपनियों में बड़े पैमाने पर लेन-देन किए गए, जबकि कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी। कुल राशि में से 2,37,40,294 रुपए को शिकायतकर्ता के एंजेल वन डिमैट खाते में निवेश दिखाया गया, जबकि 1,02,71,271 रुपए का बैलेंस बताया गया और इससे 1,34,69,023 रुपए के नुकसान का दावा किया गया।
बाकी 7,98,75,222 रुपए और शिकायतकर्ता व उनकी पत्नी के म्यूचुअल फंड के 5.55 लाख रुपए, कुल मिलाकर 8,04,30,222 रुपए, आरोपियों द्वारा शेयर बाजार में निवेश करने के बजाय अपने नियंत्रित खातों में ट्रांसफर कर लिए गए।
इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की कई टीमें बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई हैं।
सहायक पुलिस आयुक्त मनोज चावड़ा ने बताया कि शिकायतकर्ता एक सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं, जिन्हें आरोपियों ने शेयर बाजार में निवेश पर अधिक रिटर्न का लालच दिया था।
उन्होंने कहा, ''शिकायतकर्ता करीब छह महीने पहले रिटायर हुए थे, उन्होंने 2021 से 2025 के बीच लगभग 5 करोड़ रुपए निवेश किए।''
उन्होंने आगे बताया कि शिकायतकर्ता के रिश्तेदारों ने भी लगभग 4.5 करोड़ रुपए निवेश किए, जिससे कुल राशि 10 करोड़ रुपए से अधिक हो गई।
जब शिकायतकर्ता को अपनी बेटी की अमेरिका में पढ़ाई के लिए पैसे की जरूरत पड़ी तो आरोपियों ने फर्जी बैंक रसीदें और रकम जमा होने के झूठे आश्वासन दिए, जो बाद में जांच में गलत पाए गए।
उन्होंने बताया, ''वे लगातार नुकसान और लंबित भुगतान का बहाना बनाते रहे, लेकिन कोई पैसा वापस नहीं किया गया। अंत में जब उन्होंने भुगतान से इनकार कर दिया तो आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई।'' दोनों आरोपियों को 21 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
--आईएएनएस
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