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बांग्लादेश: प्रेस फ्रीडम ग्रुप की मांग, 'चार पत्रकारों के खिलाफ मामले राजनीति से प्रेरित, वापस ले सरकार'

 

वाशिंगटन, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। स्वतंत्र पत्रकारिता की बात करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने बांग्लादेश की सरकार से चार पत्रकारों को जेल से छोड़ने की गुहार लगाई है। ये चारों मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हिरासत में लिए गए थे। समूह के अनुसार, राजनीति से प्रेरित मामले को वापस लेकर उनकी रिहाई सुनिश्चित कर अपना चुनावी वादा पूरा करें।

बांग्लादेश के कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री, मोहम्मद असदुज्जमां को लिखे एक खत में, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने सरकार से फरजाना रूपा, शकील अहमद, मोजम्मेल हक बाबू और श्यामल दत्ता को रिहा करने की अपील की। सभी को हत्या के आरोप में पिछले 18 महीनों से हिरासत में रखा गया।

इसमें कहा गया है कि कोई भरोसेमंद सबूत पेश नहीं किया गया है, और उनके खिलाफ कोई चार्जशीट फाइल नहीं की गई है।

सीपीजे के मुताबिक, पिछली अंतरिम सरकार की ये कार्रवाई उनके कथित राजनीतिक जुड़ाव के बदले में की गई लगती हैं। हिरासत के लगभग 600 दिन बाद भी पुलिस पत्रकारों के खिलाफ आरोपों को साबित करने वाली चार्जशीट फाइल करने में नाकाम रही है।

खत में आगे लिखा गया, “चारों को 18 महीने से ज्यादा समय से हिरासत में रखा गया है; उन पर मर्डर का आरोप है लेकिन अब तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका है। कमेटी ने दस्तावेज पेश किए, पारिवारिक सदस्यों की गवाही ली गई और अंतरराष्ट्रीय वकीलों ने समीक्षा की, लेकिन इस आधार पर भी कोई चार्जशीट पेश नहीं की जा सकी। इन मामलों का पैटर्न पत्रकारों की रिपोर्टिंग और कथित पॉलिटिकल जुड़ाव को ध्यान में रखकर गढ़ा जाता है—ऐसी प्रैक्टिस जिससे इतर आपने काम करने का दावा किया था।”

सीपीजे ने हिरासत में लिए गए पत्रकारों की मानवीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई, और चेतावनी दी कि बिना सही मेडिकल केयर के उन्हें लगातार जेल में रखना उनकी हेल्थ और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है।

खत में आगे लिखा था, “रूपा को नवंबर 2024 में दो हफ्ते के लिए मौत की सजा पाए कैदियों के लिए रिजर्व ‘सेल’ में रखा गया था। दत्ता को 16 सितंबर, 2024 को हिरासत में लेने के कुछ ही दिनों में स्ट्रोक आया, जिसके बारे में उनके परिवार को तुरंत नहीं बताया गया। उन्हें दिल की समस्याओं और गंभीर स्लीप एपनिया की मेडिकल हिस्ट्री है, जिसका कस्टडी में रहते ख्याल भी नहीं रखा गया।”

इसमें आगे कहा गया, “सितंबर में उसी दिन गिरफ्तार हुए बाबू को प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था और 2023 के आखिर में उनकी बड़ी इनवेसिव सर्जरी हुई थी। हालांकि, उन्हें जरूरी फॉलो-अप केयर नहीं मिली है, जिससे उन्हें बिना पता चले कैंसर दोबारा होने का खतरा बना हुआ है।”

सीपीजे ने सरकार से चार पत्रकारों को आरोप मुक्त करने और उन्हें उनके परिवारों के पास लौटने पर विचार करने की अपील की है।

खत के अंत में उम्मीद जताई गई है कि किसी भी तरह के फैसले से पहले संबंधित मंत्रालय इन चारों के स्वास्थ्य को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरतेगा और इनका पूरा ख्याल रखा जाएगा।

--आईएएनएस

केआर/