केरल में चुनाव के बाद बिजली कटौती फिर शुरू, दूध की कीमतें बढ़ाने की तैयारी
तिरुवनंतपुरम, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल में 9 अप्रैल को मतदान के कुछ ही दिनों बाद दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के चुनावी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में एक बार फिर बिजली कटौती शुरू हो गई है और दूध की कीमत बढ़ाने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
मंगलवार से राज्य में आधे घंटे की लोड शेडिंग लागू कर दी गई है। हाल के वर्षों में यह पहला मौका है जब केरल में इस तरह की नियमित बिजली कटौती की गई है। वहीं, इसके 48 घंटे के भीतर केरल को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन, जिसे 'मिल्मा' के नाम से जाना जाता है, ने दूध की कीमत 52 रुपए से बढ़ाकर 56 रुपए प्रति लीटर करने का फैसला लिया है। मिल्मा के चेयरमैन के अनुसार, इस प्रस्ताव को पिनराई विजयन सरकार को भेजा जाएगा।
इन दोनों फैसलों ने राज्य में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान एलडीएफ ने बिना बिजली कटौती और जरूरी चीजों की स्थिर कीमतों को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया था। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चे ने अपने शासन मॉडल को एक उदाहरण बताया था और लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का दावा किया था।
बिजली कटौती का न होना और कीमतों में स्थिरता को प्रशासनिक कुशलता का प्रमाण बताया गया था। ऐसे में चुनाव नतीजों से पहले इन बदलावों ने राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है।
मिल्मा की बात करें तो यह 1980 में 'ऑपरेशन फ्लड' के तहत स्थापित एक तीन-स्तरीय सहकारी संस्था है। आज यह 3,102 सोसायटियों के जरिए 10.6 लाख से अधिक डेयरी किसानों से जुड़ी हुई है। तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और मालाबार में इसके क्षेत्रीय यूनियन काम करते हैं। यह संस्था केरल की डेयरी आत्मनिर्भरता और सहकारी मॉडल की सफलता का प्रतीक मानी जाती है।
हालांकि, मिल्मा के मूल्य निर्धारण के फैसलों का सामाजिक और आर्थिक असर भी होता है। वर्तमान में आचार संहिता 6 मई तक लागू है, इसलिए कीमत बढ़ाने के प्रस्ताव पर मिल्मा को चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस