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पश्चिम बंगाल में तृणमूल के वीडियो पर आपत्ति जताने पर मतदान अधिकारी की पिटाई

 

कोलकाता, 27 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में एक शिक्षक और मतदान अधिकारी सैकत चटर्जी की शुक्रवार दोपहर नादिया जिले के राणाघाट में कुछ लोगों ने पिटाई कर दी। यह घटना चुनावी प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान तृणमूल कांग्रेस के कथित प्रचार वीडियो को चलाए जाने के विरोध में घटी।

यह घटना राणाघाट देबनाथ इंस्टीट्यूट फॉर बॉयज स्कूल में हुई, जहां मतदान कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा था।

घटना के बाद घायल सैकत चटर्जी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि प्रशिक्षण सत्र के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कुछ वीडियो और पूर्वी मिदनापुर जिले के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर के दृश्य स्क्रीन पर दिखाए गए थे।

चटर्जी ने मीडियाकर्मियों को बताया, “मैंने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह आदर्श आचार संहिता का घोर उल्लंघन है। हालांकि, वहां मौजूद एक युवक बदतमीजी से पेश आया। जब मैंने उससे पहचान पत्र मांगा, तो उस युवक और उसके साथियों ने मुझे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया।

स्थानीय ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) सायंतन बसु ने कहा कि कहासुनी हुई थी, लेकिन उन्होंने चटर्जी की पिटाई के आरोपों का खंडन किया। बसु ने कहा कि उनका हमारे कुछ कर्मचारियों से झगड़ा हुआ था, लेकिन मामला सुलझ गया और प्रशिक्षण कार्यक्रम फिर से शुरू हो गया। शायद फिर से वही समस्या खड़ी हो गई। झगड़ा हमारे कर्मचारियों से ही हुआ था।

घटना के बाद मतदान कर्मियों ने प्रशिक्षण केंद्र के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और सवाल उठाया कि एक मतदान अधिकारी पर इस तरह हमला कैसे किया जा सकता है। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया।

राणाघाट निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के लोकसभा सांसद जगन्नाथ सरकार ने इस घटना को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने पूरे राज्य में आतंक का माहौल बना रखा है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। इस घटना ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है।

इस बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक, जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और संबंधित उपमंडल अधिकारी से तत्काल रिपोर्ट मांगी है।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के एक सूत्र ने बताया कि संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। एफआईआर दर्ज करने के अलावा, घटना में शामिल लोगों को तत्काल गिरफ्तार करने के आदेश भी दिए गए हैं।

इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

--आईएएनएस

एमएस/