तृणमूल कांग्रेस में फूट बिना सिद्धांतों वाली राजनीति को दर्शाती है: शशि थरूर
नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में तृणमूल कांग्रेस में हुई टूट पर अपनी राय रखी। थरूर ने कहा कि सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि किसी को भी इस बात पर शक है कि इसमें कुछ लालच, कुछ फायदे या कुछ धमकियां शामिल रही होंगी। ऐसा सिर्फ सत्ताधारी पार्टी की तरफ से ही हो सकता है क्योंकि उनके पास ही ताकत है।
बागी सांसदों द्वारा एनडीए को समर्थन करने के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति अब बिना सिद्धांतों वाली राजनीति बन गई है।
उन्होंने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, जो सबसे बड़ा गुट अलग हुआ, यानी तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद, उन्होंने खुलकर कहा है कि वे अब एनडीए के साथ जुड़ेंगे। ये वही सांसद हैं जो पिछले 12 सालों से एनडीए पर हमले करते रहे हैं। ऐसे में अचानक उनमें ये गुण दिखना बताता है कि हमारे देश की राजनीति बिना सिद्धांतों वाली राजनीति हो गई है और यह काफी दुखद है।"
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगने और केवल 80 सीटें जीत पाने के कुछ ही समय बाद पार्टी में फूट पड़ गई। सबसे पहले 58 विधायकों ने बगावत की। इस विधायकों ने विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर सोवनदेब चट्टोपाध्याय को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
इसके कुछ ही समय बाद संसद में भी मुश्किलें शुरू हो गईं। जहां तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया, वहीं 20 लोकसभा सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में शामिल होने और एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया। थरूर ने कहा कि अपने विचार या सिद्धांत रखना ठीक है, लेकिन मुख्य मकसद देश के हित में काम करना होना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अपनी सोच पर अडिग रहें और मिलकर रचनात्मक ढंग से काम करें। मैंने हमेशा कहा है कि दूसरी तरफ वाले आपके दुश्मन नहीं हैं। वे आपके विरोधी हैं और आपका काम देश के सामूहिक हित के लिए काम करना है।
उन्होंने आगे कहा कि आपको लगता है कि आपका तरीका उनके तरीके से बेहतर है और राजनीति ऐसी ही होनी चाहिए। लेकिन, निश्चित रूप से राजनीति में रहने के लिए आपके पास भारत के लिए बेहतर क्या है, इसका एक विजन होना चाहिए, ताकि एक बेहतर भारत और एक बेहतर समाज बनाया जा सके। राजनीति में रहने का यही तर्क है।
--आईएएनएस
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