पाकिस्तान में पोलियो को खत्म करने की कोशिशों को लगा झटका, खैबर पख्तूनख्वा में मिला इस साल का आठवां केस
नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पोलियो का मामला सामने आया। पाकिस्तान में यह 2026 का आठवां मामला है। यह केस सामने आने के बाद पोलियो को पूरी तरह खत्म करने की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है। इससे यह साफ होता है कि कई टीकाकरण अभियानों के बावजूद बच्चों तक वैक्सीन की पहुंच में अब भी कमियां बनी हुई हैं।
'जियो न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, तहसील बारा के यूनियन काउंसिल जनबाज-बी की 13 महीने की एक बच्ची में पाया गया है। यह इस साल खैबर जिले से सामने आया दूसरा पोलियो मामला है, जबकि पूरे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में यह छठा मामला है। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि बच्चे अब भी इस बीमारी के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने माना है कि पेशावर ब्लॉक, जिसमें खैबर और पेशावर जिले शामिल हैं, में पर्यावरणीय निगरानी के दौरान अब भी पोलियो वायरस के संकेत मिल रहे हैं। इसका मतलब है कि वायरस अब भी इलाके में सक्रिय है और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बना हुआ है।
हालांकि, पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन पहल (पीईआई) ने मामले की जांच शुरू कर दी है और वायरस के आगे फैलाव को रोकने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। इसमें विशेष टीकाकरण अभियान और नियमित टीकाकरण को मजबूत करना शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, "2026 में अब तक पाकिस्तान चार बड़े पोलियो टीकाकरण अभियान चला चुका है, जिनके तहत 4.5 करोड़ से अधिक बच्चों को कई बार पोलियो वैक्सीन दी गई है। इसके अलावा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, खासकर पेशावर ब्लॉक में, छोटे स्तर के विशेष अभियान भी चलाए गए हैं, जिनमें मौखिक और इंजेक्शन वाली दोनों तरह की वैक्सीन दी गई।"
रिपोर्ट में बताया गया है कि सितंबर में चलाए गए एक उप राष्ट्रीय अभियान में लगभग 2.93 करोड़ बच्चों तक पहुंच बनाई गई थी। अगला टीकाकरण अभियान 2 से 8 नवंबर के बीच चलाया जाएगा। इसके तहत 97 जिलों में करीब 2.4 करोड़ बच्चों को पोलियो की खुराक देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें खैबर जिला भी शामिल है।
पाकिस्तान ने 1990 के दशक की शुरुआत में अनुमानित 20,000 पोलियो मामलों की तुलना में काफी कमी दर्ज की है। 2025 में यह संख्या घटकर 31 रह गई थी, लेकिन इसके बावजूद नए मामले सामने आना पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सामने आए आठ मामलों में से छह खैबर पख्तूनख्वा से हैं, जिनमें चार मामले दक्षिणी क्षेत्रों से जुड़े हैं, जबकि दो मामले सिंध प्रांत से रिपोर्ट हुए हैं। पोलियो एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जिसका कोई इलाज नहीं है। यह बच्चों में जीवनभर के लिए लकवे (पैरालिसिस) की वजह बन सकती है और गंभीर मामलों में मौत भी हो सकती है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण ही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार टीकाकरण अभियानों की वजह से दुनिया के लगभग सभी देश पोलियो मुक्त हो चुके हैं। हालांकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान अब भी ऐसे दो देश हैं, जहां पोलियो वायरस का प्रसार पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।
--आईएएनएस
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