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कोटा में ओम बिरला के ओएसडी को धमकी मामले में कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल को पुलिस का नोटिस

 

जयपुर, 3 नवंबर (आईएएनएस)। राजस्थान के कोटा में पुलिस ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विशेष अधिकारी (ओएसडी) राजीव दत्ता को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल को नोटिस भेजा।

गुंजल ने कथित तौर पर दत्ता को ऐसी हालत में छोड़ने की धमकी दी थी कि वे आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएं।

अनंतपुरा पुलिस स्टेशन के सर्किल इंस्पेक्टर (सीआई) महेश कुमार के नेतृत्व में एक टीम गुंजल के आवास पर पहुंची और उन्हें नोटिस सौंपकर सात दिनों के भीतर पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया।

यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35(3) के तहत जारी किया गया था।

सीआई महेश कुमार ने बताया कि आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित एक मामला पहले ही रणपुर पुलिस स्टेशन में गुंजल के खिलाफ दर्ज किया जा चुका है।

यह विवाद 21 अक्टूबर को कोलाना गांव में आयोजित एक जनसभा से उपजा है, जिसमें गुंजल ने कथित तौर पर राजीव दत्ता को खुली धमकी दी थी।

कहा जाता है कि कांग्रेस नेता ने दत्ता का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे राजस्थान को कलंकित किया है।

गुंजल ने आगे कहा कि मैं दत्ता को ऐसी हालत में छोड़ दूंगा कि घर बैठे-बैठे उन्हें यह सोचना पड़ेगा कि वे आत्महत्या कर लें या बंदूक उठाकर किसी को मार डालें।

उनके इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद कांस्टेबल और खुफिया अधिकारी पुष्पेंद्र चौधरी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।

पुलिस नोटिस के बारे में बात करते हुए गुंजल ने कहा कि यह मानक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और अधिकारी नोटिस देने के लिए उनके घर आए थे।

उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे 10 नवंबर को पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा है, लेकिन मैंने इनकार कर दिया है। अगली तारीख तय होने पर क्या होता है? देखते हैं। गिरफ्तारी से कौन डरता है?

पूर्व विधायक ने राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सभी को जवाबदेह ठहराया जाएगा। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। जब भी प्रहलाद गुंजल कुछ बोलते हैं, उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया जाता है। पुलिस को यह गलतफहमी कहां से हुई कि गिरफ्तारी नोटिस जारी करके वे प्रहलाद गुंजल के घर को बंद कर सकते हैं?

मामले में लागू कानूनी प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए गुंजल ने दावा किया कि ये धाराएं लागू नहीं होती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि राजीव दत्ता महज संविदा कर्मचारी थे और सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके थे।

गुंजल ने वीडियो की प्रामाणिकता और समय को लेकर सवाल उठाया और दावा किया कि पुलिस को यह वीडियो एक मुखबिर से मिला था और यह दो साल पुराना भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि मैं इसे चुनौती के रूप में पेश करता हूं: जो भी गलत काम में लिप्त हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, गुंजल पर बिना अनुमति के मंदिर में सभा आयोजित करने, चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन करने, जनता को उकसाने और धमकी देने के आरोप हैं।

वीडियो की जांच से पता चला है कि गुंजल सभा के दौरान लोगों को उकसा रहे थे।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 223(ए), 132 और 308(2) के साथ-साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 के तहत मामला दर्ज किया है।

--आईएएनएस

एमएस/