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पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बरता के खिलाफ कश्मीरी प्रवासियों ने लंदन में निकाला मार्च

 

लंदन, 22 जून (आईएएनएस)। ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों के एक समूह ने लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और बाद में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ज्यादती का मुद्दा उठाया। उन्होंने लोगों की मौत और भोजन -दवाओं की आपूर्ति में जानबूझकर रुकावट पैदा करने के खिलाफ आवाज उठाई।

प्रदर्शनकारियों ने “स्टॉप द किलिंग्स” और “ह्युमन विद्आउट ह्युमन राइट्स” जैसे नारे लिखे हुए बैनर भी प्रदर्शित किए और ब्रिटिश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पीओके के कई क्षेत्रों में खाद्य सामग्री और दवाओं की आपूर्ति बाधित है, जिससे लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई लोग भूख और इलाज न मिलने के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं।

प्रदर्शनकारी ने ब्रिटेन में बसे कश्मीरी समुदाय की बड़ी संख्या का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस मुद्दे पर मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करे और पाकिस्तान सरकार से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश करे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ब्रिटिश नागरिक भी इस स्थिति में फंसे हुए हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटिश सरकार से तत्काल मानवीय सहायता बहाल करने, कर्फ्यू जैसी स्थितियों को हटाने और भोजन एवं दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की।

इस बीच, ब्रिटेन की सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद बॉब ब्लैकमैन ने भी हाल ही में ब्रिटिश संसद में पीओके में हुई कार्रवाई की कड़ी निंदा की।

उन्होंने कहा, " पाकिस्तान द्वारा 1947 से कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा किया गया है और हाल के समय में वहां बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों पर कठोर कार्रवाई की गई है। इन प्रदर्शनों में कम से कम 11 लोगों की मौत और बड़ी संख्या में घायल होने की रिपोर्ट है, जबकि कुछ समूहों का दावा है कि मृतकों की संख्या अधिक हो सकती है।"

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर गोलियां चलाई गईं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिससे मानवाधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।

प्रदर्शन के दौरान आयोजकों ने ब्रिटिश सरकार से मांग की कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए और प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए।

--आईएएनएस

केआर/