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पीएम मोदी की तारीफ से सीतामढ़ी की 'वेस्ट टू वेल्थ' पहल को नई पहचान, अधिकारियों ने बताए पर्यावरणीय फायदे

 

सीतामढ़ी, 26 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में सीतामढ़ी की सिंगल-यूज प्लास्टिक रीसाइक्लिंग पहल की तारीफ की। इसके बाद कई अधिकारियों ने बताया कि यह प्रोजेक्ट कैसे प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में रीसायकल करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है।

जिला मैनेजर राघव झा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि बाजपट्टी में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीडब्ल्यूएमयू) जिले के लिए एक मुख्य प्रोसेसिंग सेंटर का काम करती है।

राघव झा ने कहा, "यह पीडब्ल्यूएमयू बाजपट्टी यूनिट है, जो एक तय प्रोसेसिंग सेंटर है। यह तीन या चार अन्य ब्लॉक से जुड़ी है और हमारा नेटवर्क पूरे सीतामढ़ी जिले में फैला हुआ है। जिले में ऐसी चार यूनिट काम कर रही हैं। अलग-अलग ब्लॉक और पास के कलेक्शन सेंटर से इकट्ठा किया गया प्लास्टिक प्रोसेसिंग के लिए यहां लाया जाता है।"

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक को रीसायकल करने से नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा, "इस्तेमाल के बाद फेंका गया प्लास्टिक प्रदूषण फैलाता है, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से नष्ट नहीं होता है, इसलिए हम इसे उपयोगी उत्पादों में रीसायकल करते हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग कामों के लिए किया जा सकता है। इस पहल को आगे बढ़ाने में हमें स्थानीय प्रतिनिधियों का पूरा सहयोग मिल रहा है।"

मुखिया प्रतिनिधि रंजीत सिंह ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम बताया।

उन्होंने कहा, "यह एक सकारात्मक पहल है। सिंगल-यूज प्लास्टिक जिसे लोग आमतौर पर फेंक देते हैं, उसे अब इकट्ठा करके रीसायकल किया जा रहा है और बेंच व अन्य उपयोगी चीजें बनाई जा रही हैं। पर्यावरण के नजरिए से यह बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इससे प्रदूषण कम होता है और साफ-सुथरे पर्यावरण को बढ़ावा मिलता है।"

सरपंच प्रतिनिधि अनवरुल हक ने कहा कि प्रधानमंत्री की तारीफ से लोगों को इस अभियान में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने सभी के फायदे के लिए इस पहल के बारे में बात की है। प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करके रीसायकल किया जा रहा है और प्लास्टिक की कुर्सियों जैसे उपयोगी उत्पाद बनाए जा रहे हैं।"

वार्ड सदस्य देवेंद्र साह ने कहा कि इस पहल से पूरी पंचायत में कचरा प्रबंधन में सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा, "पहले कचरा कहीं भी फेंक दिया जाता था। अब प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा किया जाता है, अलग-अलग किया जाता है और प्रोसेसिंग के लिए यहां लाया जाता है। फिर इसे कुर्सियों जैसे उपयोगी उत्पादों में रीसायकल किया जाता है, जिन्हें पंचायत में अलग-अलग जगहों पर लगाया जाता है।"

इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' के ताजा एपिसोड में प्लास्टिक प्रदूषण, जो एक गंभीर वैश्विक पर्यावरणीय चुनौती है, और बिहार के सीतामढ़ी जिले से निकले इसके एक आसान और संभव समाधान की ओर देश का ध्यान आकर्षित किया।

पीएम मोदी ने सीतामढ़ी की 'वेस्ट टू वेल्थ' (कचरे से संपदा) पहल का जिक्र किया, जहां कचरे को रीसायकल किया जा रहा है।

सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरे को मजबूत, टिकाऊ, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल बेंचों में बदला जाता है। हर बेंच को बनाने में लगभग 40 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। ये बेंच मजबूत और आकर्षक होती हैं और इन्हें सरकारी स्कूलों, पार्कों और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर लगाया जा रहा है।

इस पहल की हर तरफ तारीफ हो रही है और यह छात्रों और नागरिकों के बीच पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता भी फैला रही है।

पीएम मोदी ने कहा, "बच्चे यह सीख रहे हैं कि जिस प्लास्टिक को वे कभी कचरा समझकर फेंक देते थे, उसे टेक्नोलॉजी और सही मैनेजमेंट के जरिए समुदाय की एक कीमती संपत्ति में बदला जा सकता है। यह कोशिश दिखाती है कि 'रिड्यूस, रियूज और रीसायकल' (कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और रीसायकल) के सिद्धांत अब सिर्फ नारे नहीं रह गए हैं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "जिला प्रशासन ने भी स्थानीय यूनिट के साथ मिलकर इसमें अहम भूमिका निभाई है।"

बेंच बनाने से पहले पूरे जिले से प्लास्टिक इकट्ठा किया जाता है, उसे साफ किया जाता है, छांटा जाता है और प्रोसेस किया जाता है। एक दर्ज किए गए चरण में, चार ब्लॉक (डुमरा, रीगा, बाजपट्टी और रुन्नीसैदपुर) से लगभग 8,000 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक इकट्ठा किया गया; इसमें से 4,000 किलोग्राम प्लास्टिक को रीसायकल करके 85 आकर्षक बेंच बनाई गईं।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी