पश्चिम एशिया संकट को लेकर पीएम मोदी ने बुलाई सीसीएस की बैठक, भारतीयों की सुरक्षा के दिए निर्देश
नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनज़र आयोजित कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए भारतीय नागरिकों और विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय के हितों की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए।
बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा ऊर्जा, उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
बैठक के दौरान आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन किया गया। साथ ही उर्वरकों की वैकल्पिक आपूर्ति के स्रोतों पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि देश में उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
इस बैठक को लेकर पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ''आज मैंने पश्चिम एशिया में चल रही घटनाओं के बाद की स्थिति की समीक्षा के लिए सीसीएस की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में लोगों के कल्याण और जरूरी चीज़ों की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।''
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में घरेलू और विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि नाविकों और उनके परिवारों को समय पर सूचना, आपातकालीन सहायता तथा परामर्श उपलब्ध कराने के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। यह चर्चा ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा सहित नवीकरणीय और अन्य गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार का 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' दृष्टिकोण जारी रहना चाहिए। साथ ही सभी घटनाक्रमों की नियमित निगरानी और आवश्यक कदमों के त्वरित क्रियान्वयन के लिए एक समन्वित तंत्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में कैबिनेट सचिव ने सीसीएस को मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों, एलएनजी, एलपीजी और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि एलपीजी की खरीद के स्रोतों में विविधता लाई जा चुकी है और प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार तथा आपूर्ति की स्थिति पर्याप्त बनी हुई है।
कैबिनेट सचिव ने यह भी बताया कि कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) की रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर संचालित हो रही हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन लगातार जारी है। इसके अलावा पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शनों के विस्तार से देश में पीएनजी उपभोक्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय गैस ग्रिड के विस्तार, एलएनजी आयात और री-गैसीफिकेशन अवसंरचना को मजबूत करने, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के विस्तार तथा पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑर्डर-2026 के तहत समयबद्ध पाइपलाइन और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी की मंजूरी देकर उद्योगों में एलपीजी के विकल्प के रूप में प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
--आईएएनएस
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