पीयूष गोयल ने प्रवासी भारतीयों को अमेरिका-भारत का 'जीवंत सेतु' बताया
वॉशिंगटन, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय-अमेरिकियों को भारत और अमेरिका के बीच एक "जीवंत सेतु" बताया है। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे अपने अपनाए हुए देश के प्रति समर्पित रहें और साथ ही अपने दिल में अपनी मातृभूमि के लिए भी जगह बनाए रखें।
शिकागो में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद गोयल ने कहा कि अमेरिकी समाज में उनके योगदान ने दोनों देशों को करीब लाने में भी मदद की है।
गोयल ने कहा, "आप में से हर कोई अमेरिका और भारत के बीच एक जीवंत सेतु की तरह है। आप में से हर कोई अमेरिका में भारत का एक राजदूत है।"
उन्होंने अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों के योगदान के लिए उनका धन्यवाद किया और उनसे उस देश के प्रति वफादार रहने का आग्रह किया जिसने उन्हें अवसर, समृद्धि और भविष्य दिया है।
उन्होंने कहा, "इसके प्रति वफादार रहें, इसके प्रति ईमानदार रहें, अपने देश के लिए कड़ी मेहनत करें। लेकिन हमेशा अपने मन और दिल में अपनी मां और सभी लोगों के लिए थोड़ी जगह रखें।"
गोयल की ये बातें शिकागो में उनके एक दिन के दौरे के दौरान सामने आईं, जिसमें उन्होंने भारत की दो सबसे जानी-मानी हस्तियों महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद से जुड़ी जगहों का दौरा किया।
गांधी जयंती पर मंत्री ने इलिनोइस के स्कोकी में महात्मा गांधी मेमोरियल स्कल्पचर पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी।
गोयल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "महात्मा गांधी के अहिंसा, सादगी और सच्चाई के सदाबहार आदर्श, जो भारत की सभ्यतागत सोच में गहराई से रचे-बसे हैं, पीढ़ियों से मानवता का मार्गदर्शन और प्रेरणा देते आ रहे हैं।"
भारतीय समुदाय के लोगों से बात करते हुए गोयल ने गांधीजी के अहिंसा, समानता और समाज के पिछड़े वर्गों के कल्याण पर जोर को याद किया। उन्होंने अमेरिका पर गांधीजी के विचारों के प्रभाव का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, "आज शिकागो में लगी यह मूर्ति हमें एक गहरा संदेश भी देती है कि भले ही भारत यहां से हजारों मील दूर हो, लेकिन उनके विचार आप सभी शिकागो के लोगों में जीवित हैं।"
गोयल ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारत के समर्थन का पक्का भरोसा दिलाया और कहा कि जब भी विदेश में उनके नागरिकों पर कोई संकट आता है, तो नई दिल्ली हमेशा उस पर ध्यान देती है।
यमन, यूक्रेन और दूसरी जगहों पर आए संकटों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हम देश में आपके साथ खड़े हैं। हम आपकी परवाह करते हैं और आपको हमेशा हमारा समर्थन मिलेगा। आपका देश, आपकी मातृभूमि हमेशा आपके, आपके परिवारों और आपके बच्चों के साथ खड़ी रहेगी।"
इससे पहले, गोयल ने शिकागो के आर्ट इंस्टीट्यूट में फुलर्टन हॉल का दौरा किया, जो 1893 में 'वर्ल्ड्स पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन' (विश्व धर्म संसद) में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण से जुड़ा है।
गोयल ने 'एक्स' पर लिखा, "उस जगह पर, जहां कभी स्वामी विवेकानंद जी के लिए जोरदार तालियां गूंजी थीं। विवेकानंद ने 11 सितंबर, 1893 को अपने भाषण के जरिए दुनिया के सामने भारत की "वसुधैव कुटुंबकम" की भावना को रखा था।"
उन्होंने कहा, "स्वामी विवेकानंद का सार्वभौमिक भाईचारे और आध्यात्मिक ज्ञान का कालातीत संदेश हमें हमेशा मार्गदर्शन देता रहे।"
बाद में गोयल ने शिकागो में भारत के वाणिज्य दूतावास में विवेकानंद को फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी।
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि विवेकानंद के विचार भारतीयों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों को प्रेरित करते रहते हैं। उन्होंने विवेकानंद को एक ऐसे युवा भारतीय के तौर पर बताया जो अपनी विरासत, परंपराओं और संस्कृति पर गर्व के साथ अमेरिका पहुंचे थे और जिन्होंने शिकागो के मंच का इस्तेमाल हिंदू धर्म और अलग-अलग धर्मों की एकता के बारे में बात करने के लिए किया था।
--आईएएनएस
ओपी/एएस