ईडी के समन के बाद नए रिकॉर्ड से जुड़े पिनाराई विजयन, सीपीआई(एम) में पहली बार पोलित ब्यूरो सदस्य को नोटिस
तिरुवनंतपुरम, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नाम अब एक और रिकॉर्ड जुड़ गया है।
वे सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के ऐसे पहले सदस्य बन गए हैं जिन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन भेजा है। उन्हें 'मसाप्पाडी' (सीएमआरएल-एक्सलॉजिक) मामले के सिलसिले में शुक्रवार को ईडी अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया है।
विजयन के लिए राजनीतिक रिकॉर्ड कोई नई बात नहीं है। उन्होंने 1998 से 2015 तक सीपीआई (एम) के राज्य सचिव के रूप में काम किया और फिर 2016 से 2026 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री रहे। केरल का कोई अन्य मुख्यमंत्री लगातार दो पूरे कार्यकाल पूरे नहीं कर पाया है।
अब, ईडी के समन ने उनके राजनीतिक करियर में एक बिल्कुल अलग तरह की पहचान जोड़ दी है। इस विडंबना को नजरअंदाज करना मुश्किल है।
सीपीआई (एम) ने अपनी राजनीतिक पहचान का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगने के इर्द-गिर्द बनाया है।
2015 में, पार्टी ने 'बार रिश्वत मामले' को लेकर तत्कालीन वित्त मंत्री केएम मणि के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया। हाई कोर्ट के एक जज की तीखी टिप्पणियों के बाद, उन्हें अंततः इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
'सोलर स्कैम' विवाद के दौरान, तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी (2011-16) के सबसे मुखर आलोचकों में खुद विजयन भी शामिल थे। उन्होंने बार-बार चांडी के इस्तीफे की मांग की, और कई बार तो ऐसी तीखी भाषा का इस्तेमाल किया जो संसदीय शिष्टाचार की सीमाओं से कहीं बाहर थी। बाद में, चांडी को इन आरोपों से बरी कर दिया गया।
आज सारा ध्यान विजयन पर आ गया है। उन पर आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' को कुछ भुगतान किए थे, और यह कंपनी उनकी बेटी टी. वीना से जुड़ी हुई है। इन लेन-देन के सिलसिले में दो मामले दर्ज किए गए हैं।
दोनों ही मामलों में वीना दूसरी आरोपी हैं, जबकि उनके पति और सीपीआई (एम) विधायक पीए मोहम्मद रियास हवाला से जुड़े एक अलग मामले में पहले आरोपी हैं। सीपीआई (एम) का हमेशा से यही बचाव रहा है कि ईडी का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। हो सकता है कि यह तर्क पार्टी की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हो, लेकिन इससे समन (बुलावा) खत्म नहीं हो जाता।
अगर किसी और राजनीतिक दल के नेता के साथ ऐसा कुछ हुआ होता, तो शायद सीपीआई (एम) ने तुरंत इस्तीफे की मांग की होती। हालांकि, विजयन के मामले में पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है।
ओमन चांडी ने एक बार कहा था कि केरल की राजनीति में अक्सर यह मायने नहीं रखता कि क्या काम किया गया है, बल्कि यह मायने रखता है कि वह काम किसने किया है।
मौजूदा विवाद इस बात की एक नई परीक्षा पेश करता है। जो पार्टी लंबे समय से दूसरों से जवाबदेही की मांग करती रही है, उसके सामने अब सवाल यह है कि क्या यही पैमाना उसके अपने घर (पार्टी) पर भी लागू होता है।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी