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पैराग्वे अमेरिका के एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर समझौते में शामिल, 'पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन' पर किया हस्ताक्षर

 

वाशिंगटन, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। पैराग्वे अमेरिका की अगुवाई वाली एक पहल में शामिल हो गया है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करना और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही पैराग्वे 'पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन' पर हस्ताक्षर करने वाला 26वां देश बन गया है।

इस समझौते पर शुक्रवार को वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश विभाग में औपचारिक हस्ताक्षर किए गए। पैराग्वे के विदेश मंत्री रामिरेज और अमेरिका के आर्थिक मामलों के अवर विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग ने इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि दोनों देशों ने पैराग्वे के खनिज संसाधनों और उसकी प्रचुर जलविद्युत क्षमता का उपयोग कर उन्नत एआई ढांचा विकसित करने की संभावनाओं पर साथ काम करने पर सहमति जताई है। इस कदम के साथ दक्षिण अमेरिका का एक और देश उस अमेरिकी समर्थित व्यवस्था का हिस्सा बन गया है, जो ऊर्जा संसाधनों, रणनीतिक खनिजों और एआई सिस्टम के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को एक साथ जोड़ने पर केंद्रित है।

विदेश विभाग ने अपने बयान में कहा, "आज अमेरिका ने 'पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन' के 26वें हस्ताक्षरकर्ता के रूप में पैराग्वे का स्वागत किया।"

बयान के अनुसार, यह हस्ताक्षर इस पहल में पैराग्वे की आधिकारिक भागीदारी की शुरुआत है। अमेरिका इस मंच का उपयोग उन तकनीकों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए कर रहा है, जिन्हें आर्थिक प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

दोनों देशों ने यह भी पुष्टि की कि वे पैराग्वे के महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों और जलविद्युत क्षमता का उपयोग करते हुए अमेरिका महाद्वीप में 'सुपर इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर' विकसित करने की दिशा में काम करेंगे। हालांकि, घोषणा में किसी खास खनन परियोजना, प्रस्तावित डेटा सेंटर या उन अमेरिकी कंपनियों का नाम नहीं बताया गया जो इसमें शामिल हो सकती हैं।

इसके अलावा, किसी निवेश योजना, निर्माण समयसीमा या वित्तीय व्यवस्था की भी जानकारी नहीं दी गई। यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस घोषणा में शामिल होने से सहयोग का एक ढांचा तैयार होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी विशेष परियोजना को मंजूरी मिल गई है या उसके लिए धन उपलब्ध करा दिया गया है।

पैराग्वे की भागीदारी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि बिजली की उपलब्धता और उन्नत कंप्यूटिंग सुविधाओं के विकास के बीच कितना गहरा संबंध है। बड़े एआई सिस्टम को चलाने के लिए विशाल कंप्यूटिंग क्षमता, बड़े डेटा सेंटर, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति और विशेष उपकरणों की जरूरत होती है। इसी वजह से ऊर्जा की उपलब्धता अब तकनीकी निवेश के फैसलों में एक अहम कारक बनती जा रही है।

पैराग्वे के पास मौजूद विशाल जलविद्युत संसाधन ऊर्जा की अधिक खपत करने वाली कंप्यूटिंग परियोजनाओं को आकर्षित करने में मददगार साबित हो सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता या जरूरी बुनियादी ढांचे का कोई विस्तृत आकलन जारी नहीं किया है।

घोषणा में महत्वपूर्ण खनिजों का जिक्र भी अमेरिका की उस व्यापक रणनीति को दिखाता है, जिसके तहत वह उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा प्रणालियों और रणनीतिक तकनीकों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति को सुरक्षित करना चाहता है। ऐसी आपूर्ति श्रृंखलाओं में कई देश शामिल हो सकते हैं, जहां खनिजों के खनन और प्रसंस्करण से लेकर उन्नत औद्योगिक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण तक का काम होता है।

पैराग्वे को 'पैक्स सिलिका' में शामिल करके अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपनी तकनीकी कूटनीति (टेक्नोलॉजी डिप्लोमेसी) का दायरा और बढ़ा रहा है। यह पहल सदस्य देशों को ऐसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा का मंच भी देती है, जहां ऊर्जा, औद्योगिक क्षमता और तकनीकी विकास एक-दूसरे से तेजी से जुड़े हुए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर की सरकारें महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत डिजिटल बुनियादी ढांचे तक पहुंच को आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं।

--आईएएनएस

एवाई/पीएम