राजस्थान: पांचना बांध का पानी छोड़ने की मांग, प्रदर्शनकारी किसानों ने 27 जून तक का दिया अल्टीमेटम
खंडीप, 23 जून (आईएएनएस)। राजस्थान में पांचना बांध का पानी नहरों में छोड़ने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब बड़ा रूप ले लिया है। विधायक रामकेश मीणा ने मंगलवार को कहा कि पिछले 70 वर्षों में राजस्थान में किसानों का इतना बड़ा आंदोलन नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि खंडीप महापंचायत अब पूरे राज्य का मुद्दा बन चुकी है और इसकी चर्चा दिल्ली तक पहुंच गई है।
आंदोलन के 19वें दिन किसानों को संबोधित करते हुए रामकेश मीणा ने राज्य सरकार पर आंदोलन को कमजोर करने के लिए समाजों के बीच विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों ने 27 जून तक नहरों में पानी छोड़ने की समय-सीमा तय की है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े आंदोलन के बावजूद सरकार चुप क्यों है। उन्होंने कहा कि मंत्री आसपास के गांवों में तो जा रहे हैं लेकिन खंडीप आने से बच रहे हैं।
पांचना बांध का पानी छोड़ने की मांग को लेकर चल रही महापंचायत और अनिश्चितकालीन धरने में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। इस दौरान सांसद, विधायक और कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी पहुंचे और आंदोलन को खुला समर्थन दिया।
धरना स्थल पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। नदौती और टोडाभीम तहसीलों के दर्जनों गांवों से पंच-पटेल, किसान, महिलाएं और युवा आंदोलन के समर्थन में पहुंचे।
सभा को हरीश चंद्र मीणा, विधायक घनश्याम मेहर, पूर्व विधायक लखन सिंह मीणा और पूर्व मंत्री गोलमा देवी ने संबोधित किया। सभी नेताओं ने किसानों का समर्थन करते हुए तुरंत पानी छोड़ने की मांग की।
पूर्व विधायक लखन सिंह मीणा ने कहा कि जब तक किसानों को न्याय नहीं मिलता और पांचना बांध का पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, "किसानों के अधिकारों की इस लड़ाई को हम अंत तक लड़ेंगे। किसानों के हक की अनदेखी नहीं होने देंगे।"
विधायक घनश्याम मेहर ने सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "यह किसी एक गांव या एक समाज का आंदोलन नहीं है, बल्कि हजारों किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। हर जनप्रतिनिधि को खंडीप आकर किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए। जो नहीं आएंगे, उन्हें जनता को जवाब देना होगा।"
रामकेश मीणा ने कहा कि आंदोलन का दायरा इतना बढ़ चुका है कि यह राजस्थान के सबसे चर्चित आंदोलनों में शामिल हो गया है।
उन्होंने कहा, "हमने सरकार को 27 जून तक का समय दिया है। उससे पहले हमारी नहरों में पानी छोड़ने का आदेश जारी किया जाना चाहिए।"
सांसद हरिश्चंद्र मीणा ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग पूरी तरह न्यायसंगत है और अदालत के फैसलों के अनुरूप है।
उन्होंने कहा, "हमारी लड़ाई किसी समाज के खिलाफ नहीं है। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि सरकार अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाए। यह आंदोलन सफल होकर रहेगा।"
पंचना कमांड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति ने घोषणा की कि 24 जून को क्षेत्र के विभिन्न गांवों से हजारों किसान, महिलाएं, युवा और पंच-पटेल सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ आंदोलन स्थल पर पहुंचेंगे।
समिति और विधायक रामकेश मीणा ने सभी सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों से, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, आंदोलन स्थल पर पहुंचकर किसानों का समर्थन करने की अपील की।
आंदोलन में लगातार बढ़ती भीड़ और राजनीतिक समर्थन को देखते हुए खंडीप महापंचायत पूर्वी राजस्थान के सबसे बड़े किसान आंदोलनों में से एक बनती जा रही है। किसानों ने साफ कहा कि यदि 27 जून तक पांचना बांध का पानी नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
--आईएएनएस
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