ईरान-अमेरिका युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका प्रतीकात्मक, ठोस नहीं: रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम कराने में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर जो चर्चा हो रही है, उसे एक रिपोर्ट ने “प्रतीकात्मक” बताया है, न कि ठोस या निर्णायक।
रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ईरान और अमेरिका की कुछ पोस्ट्स के आधार पर पाकिस्तान को युद्धविराम का अहम मध्यस्थ बताया जा रहा है, लेकिन कूटनीतिक विश्लेषण इस दावे को सही नहीं ठहराता।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में करीब 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद भले ही दो हफ्तों के लिए हथियार शांत हुए हों, लेकिन यह शांति बेहद अस्थायी है और कभी भी टूट सकती है। यह युद्धविराम मजबूरी और सीमित विकल्पों का नतीजा बताया गया है।
इसमें यह भी कहा गया कि अमेरिका की सैन्य रणनीति और तेजी से पीछे हटने के संकेतों ने सुरक्षा समुदाय में भरोसा नहीं जगाया। खार्ग द्वीप पर हमले की कोशिश भी जोखिम भरी साबित हुई। ऐसे में अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा और उसे युद्धविराम की ओर बढ़ना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अपनी भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और यह एक “हाई-वोल्टेज प्रतीकात्मक प्रचार” जैसा है। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान के पास ऐसा कोई ठोस प्रभाव या दबाव नहीं है, जिससे वह ईरान या अमेरिका को युद्धविराम के लिए मजबूर कर सके।
हाल ही में भारत में ईरान के राजदूत ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थता के दावों को खारिज किया था।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पाकिस्तान की भूमिका केवल एक “साधारण सहायक” की रही है, न कि किसी प्रभावशाली मध्यस्थ की। हालांकि, पाकिस्तान की मीडिया इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रही है।
इस बीच, भारत में इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार ने भी कहा कि पाकिस्तान ने इस संघर्ष में कोई बड़ी या सकारात्मक भूमिका नहीं निभाई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने कारणों से पाकिस्तान को एक सहायक के रूप में इस्तेमाल किया है और वे अमेरिका की योजना पर भरोसा करते हैं।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि पाकिस्तान की भूमिका को लेकर जो धारणा बनाई जा रही है, वह वास्तविकता से ज्यादा प्रतीकात्मक है।
--आईएएनएस
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