पाक का सीमा-पार आतंकवाद पूरे दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ा रहा
ब्रसेल्स, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान सीमा पार आतंकी गतिविधियों पर लगाम नहीं लगा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप पूरे दक्षिण एशिया में अस्थिरता बनी हुई है। एक रिपोर्ट ये दावा करती है कि दशकों से चल रहे छद्म युद्ध के कारण भारत पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है।
यूरोपियन टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद ने आतंकवाद का इस्तेमाल "एक हथियार और लंबे समय तक चलने वाले युद्ध" के तौर पर किया है, जिसका मकसद भारत को कमजोर करना है। इसके बावजूद, भारतीय लोगों और संस्थाओं की दृढ़ता ने देश को इस दबाव को झेलने में सक्षम बनाया है।
रिपोर्ट में बताया गया, "आतंकवाद भारत के लिए सबसे घातक रहा है—न सिर्फ इसमें लोगों की जान गई, बल्कि इसने सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक घाव भी छोड़े हैं। इस त्रासदी की जड़ में पाकिस्तान की सोची-समझी रणनीति है, जिसके तहत वह सीमा पार उग्रवाद को बढ़ावा देता है—यह एक छद्म युद्ध (प्रॉक्सी वॉर) है जिसका मकसद भारत को अस्थिर करना और उसके संसाधनों को खत्म करना है। इस्लामाबाद जिसे बचाव की रणनीति बताता है, वह असल में अघोषित युद्ध बन गया है जो धीरे-धीरे भारत को कमजोर कर रहा है और उसे लगातार सतर्क रहने, सेना को तैयार रखने और नुकसान उठाने के चक्र में फंसाए हुए है।"
रिपोर्ट में आगे कहा गया, "पाकिस्तान की सेना के लिए भारत लंबे समय से अस्तित्व के लिए खतरा रहा है। इस काल्पनिक खतरे से निपटने के लिए उसने उग्रवादी नेटवर्क बनाए और उन्हें पनाह, ट्रेनिंग और लॉजिस्टिकल मदद दी। शुरुआत में कश्मीरी युवाओं को भर्ती किया गया, लेकिन जल्द ही इसमें अफगान-सोवियत युद्ध में अनुभवी विदेशी लड़ाके भी शामिल हो गए।"
इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की मदद से, इन लोगों ने पाकिस्तान के कैंपों में ट्रेनिंग ली, जहां उन्हें हथियार चलाने, विस्फोटक इस्तेमाल करने, गुरिल्ला युद्ध की तकनीक और मुश्किल हालात में जीवित रहने के कौशल सिखाए गए।
इसमें बताया गया कि घुसपैठियों को लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पार करने में गाइड और इलाके की भौगोलिक स्थिति से मदद मिलती थी, साथ ही उन्हें पाकिस्तानी सेना से कथित तौर पर सैन्य सुरक्षा भी मिलती थी। रिपोर्ट के अनुसार, हथियार, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और फंड आईएसआई के चैनलों, हमदर्द दानदाताओं, नशीले पदार्थों की तस्करी और जबरन वसूली के जरिए पहुंचाए जाते थे।
रिपोर्ट में भारत पर पाकिस्तान-बेस्ड आतंकवादी समूहों द्वारा किए गए बड़े आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा गया, "2001 में संसद पर हुए हमले को पाकिस्तान में प्रशिक्षित जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने अंजाम दिया था, जो भारतीय लोकतंत्र के मूल पर प्रहार था। 2008 में मुंबई पर हुए हमले, जिनकी साजिश पाकिस्तान की जमीन से बहुत बारीकी से रची गई थी, में 166 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए; इन हमलों ने तीन दिनों तक मुंबई को युद्ध का मैदान बना दिया था। 2016 के उरी हमले में 19 सैनिक शहीद हुए, जिसके जवाब में 'सर्जिकल स्ट्राइक' की गई। 2019 में पुलवामा बम धमाके में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए, जिससे तनाव फिर से बढ़ गया और टकराव की स्थिति पैदा हुई।"
रिपोर्ट में 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख है, जिसमें पाकिस्तान के एक आतंकवादी समूह ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी; यह घटना लगातार बने हुए खतरे को उजागर करती है।
इस बात पर जोर देते हुए कि इस आतंकी अभियान के बावजूद भारत का मजबूत बने रहना निर्विवाद है, रिपोर्ट में कहा गया, "फिर भी, समाज पर आतंकी हमलों के असर (मानसिक आघात और आर्थिक बोझ के रूप में) बहुत ज्यादा हैं। आतंकवाद ने कई पीढ़ियों को गहरे जख्म दिए हैं, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को बदला है और विकास व स्थिरता के लिए भारी कीमत वसूली है।"
--आईएएनएस
केआर/