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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर तीन नागरिकों को जबरन लापता करने का आरोप

 

क्वेटा, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। बलूचिस्तान के केच जिले में अलग-अलग घटनाओं के दौरान पाकिस्तानी बलों ने कम से कम तीन नागरिकों को जबरन गायब कर दिया है। इनमें 16 साल का एक छात्र भी शामिल है।

द बलूचिस्तान पोस्ट ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अकरम नाम के एक नागरिक को सोमवार को पाकिस्तानी खुफिया कर्मियों द्वारा जबरन लापता कर दिया गया, जिससे वह हाल के दिनों में लापता होने वाला अपने परिवार का चौथा युवक बन गया है।

खबरों के अनुसार, फ्रंटियर कोर (एफसी) के कर्मियों ने परिवार को अपने लापता रिश्तेदारों के राष्ट्रीय पहचान पत्र और स्थानीय निवास प्रमाण पत्र एफसी शिविर में लाने के लिए कहा था।

इसके बाद अकरम दो अन्य परिवार के सदस्यों के साथ दस्तावेज जमा करने शिविर गया। लेकिन जब वे जा रहे थे, तो एक कार में सवार अज्ञात लोगों ने उन्हें जबरन अगवा कर लिया, जबकि अन्य दो को जाने दिया गया। सूत्रों का आरोप है कि ये लोग पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों से जुड़े थे।

तब से अकरम के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

एक अलग मामले में, मुनीर अहमद नादिल के 16 वर्षीय छात्र शमशेर अहमद के घर में हथियारबंद लोगों के घुसने के बाद उसे बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया गया। यह घटना केच के तुरबत क्षेत्र में हुई।

उनके परिवार ने आरोप लगाया कि इसमें शामिल लोग राज्य समर्थित 'डेथ स्क्वाड' से संबंधित थे।

इस बीच, पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को केच के सोराग निवासी हनीफ को कथित तौर पर हिरासत में ले लिया और उसे एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, उसका पता अभी तक नहीं चल पाया है।

ये ताजा घटनाएं बलूचिस्तान में गैर-न्यायिक हत्याओं और जबरन गायब किए जाने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर सामने आई हैं।

गुरुवार को मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा दो और बलूच नागरिकों की गैर-न्यायिक हत्या कर दी गई।

मानवाधिकार संस्था बलूच वॉइस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने खुलासा किया कि अदील बलूच का शव 23 अक्टूबर को केच जिले के सेरनकिन क्षेत्र से बरामद किया गया, उसके जबरन गायब होने के तीन दिन बाद।

बीवीजे के अनुसार, अदील और तीन अन्य युवकों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और राज्य समर्थित मौत के दस्तों द्वारा कोहर बाजार में छापेमारी के दौरान हिरासत में लिया गया था। इसमें आगे कहा गया है कि उन्हें अज्ञात स्थानों पर स्थानांतरित करने से उनके परिवारों को उनके ठिकाने या सुरक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

--आईएएनएस

एमएस/