बलूचिस्तान में पाकिस्तानी बलों पर दो नागरिकों की गैर-न्यायिक हत्या का आरोप
क्वेटा, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान के बलों ने बलूचिस्तान में दो और बलूच नागरिकों की गैर-न्यायिक हत्या कर दी है। यह घटनाएं ऐसे समय सामने आई हैं जब प्रांत में कथित जबरन गुमशुदगी और गैर-न्यायिक हत्याओं के मामलों को लेकर चिंता बढ़ रही है।
मानवाधिकार संगठन बलोच वॉइस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने बताया कि आदिल बलूच का शव 23 अक्टूबर को केच जिले के सर्नकिन क्षेत्र से बरामद किया गया। संगठन के अनुसार, उन्हें तीन दिन पहले कथित रूप से जबरन लापता किया गया था।
बीवीजे के मुताबिक, आदिल और तीन अन्य युवकों को कोहार बाजार में छापेमारी के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और राज्य समर्थित समूहों द्वारा हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया, जिससे उनके परिवारों को उनकी स्थिति और ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
बीवीजे ने कहा कि आदिल का शव मिलने से उनकी मौत की परिस्थितियों और हिरासत के दौरान उनके साथ हुए कथित व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। संगठन ने इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
संगठन ने आदिल की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और हिरासत में लिए गए अन्य तीन युवकों के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
वहीं, बलोच यकजेहती समिति (बीवाईसी) ने एक अलग घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 24 वर्षीय चालक बाबा बलूच का क्षत-विक्षत शव 14 अक्टूबर को पंजगुर जिले के रख्शान कौर क्षेत्र में मिला था।
संगठन के अनुसार, बाबा बलूच 17 दिनों से कथित रूप से जबरन लापता थे। बाद में उनका शव बरामद हुआ।
बीवाईसी ने आरोप लगाया कि बलूच समुदाय सामूहिक दंड जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है और कई लोगों की बिना किसी कारण हत्या की जा रही है।
संगठन ने कहा कि किसी व्यक्ति के जबरन गायब होने और बाद में उसका शव मिलने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इससे बलूच नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
बीवाईसी ने कहा कि बलूच युवाओं को बार-बार निशाना बनाए जाने और जबरन गुमशुदगी के बाद शव मिलने के मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं और कार्यकर्ताओं से इन घटनाओं पर आवाज उठाने की अपील की। साथ ही कहा कि पाकिस्तान से यह जवाब मांगा जाना चाहिए कि युवाओं को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सभी लोगों को जीवन और सुरक्षा का अधिकार है तथा इन मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी