खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए पाकिस्तान को कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण की जरूरत: रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में बढ़ती गर्मी ने जल संसाधनों में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिससे जल स्तर लगातार गिर रहा है और फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। बढ़ती आबादी के बीच इन परिस्थितियों ने देश में खाद्य असुरक्षा की समस्या को और गंभीर कर दिया है। ऐसे में इस खतरे से निपटने के लिए पाकिस्तान को अपने कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने की जरूरत है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
पाकिस्तान वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में करीब एक प्रतिशत का योगदान देता है। इसके बावजूद वह ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। 'द फ्राइडे टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के मानसून के दौरान पाकिस्तान में 13 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आ गई थी। इससे चावल, कपास और गन्ने की फसलों को नुकसान हुआ और कृषि क्षेत्र को करीब 1.23 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
रिपोर्ट में अमना एजाज रफी के हवाले से कहा गया, "जलवायु परिवर्तन के कारण देश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक गर्मी ने जल संसाधनों में अस्थिरता को भी बढ़ाया है। इसके परिणामस्वरूप फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि जल स्तर लगातार कम हो रहा है। ये सभी कारक खाद्य असुरक्षा में योगदान दे रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की करीब 24 करोड़ की आबादी 2.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जिससे खाद्य असुरक्षा की चुनौती और गंभीर हो गई है। वर्ष 2050 तक देश की आबादी 30 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य असुरक्षा के खतरे से निपटने के लिए पाकिस्तान को कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना होगा। वित्त वर्ष 2025 में पाकिस्तान का खाद्य आयात बिल करीब 8 अरब डॉलर रहा। खाद्य आयात पर खर्च होने वाली यह राशि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
पाकिस्तान पहले से ही पानी की कमी का सामना कर रहा है। ऐसे में देश को नए बांध बनाने की जरूरत है, जिससे बारिश के पानी को संग्रहित कर सर्दियों के महीनों में उसका इस्तेमाल किया जा सके।
बाढ़ और अन्य चरम मौसमी घटनाओं के कारण ग्रामीण परिवारों को भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 'द फ्राइडे टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की बाढ़ के दौरान पाकिस्तान में करीब 22,800 पशुओं की मौत हुई। इससे ग्रामीण लोगों की आजीविका प्रभावित होने के साथ-साथ चरम मौसम की घटनाओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों से विस्थापित भी होना पड़ा।
वहीं, जुलाई में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी और सबसे बड़े शहर क्वेटा में भीषण जल संकट पैदा हो गया था। पाकिस्तानी दैनिक 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, शहर में भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया था और वाटर एंड सैनिटेशन एजेंसी (वासा) की आधिकारिक जल आपूर्ति कई रिहायशी इलाकों में पूरी तरह बंद या बेहद सीमित हो गई थी।
सरियाब, सिरकी रोड, समुंगली रोड, जिन्ना टाउन, कंबरानी रोड, सैटेलाइट टाउन, सबजल रोड और खयाबान-ए-आगा समेत कई इलाकों के लोग पानी की भारी कमी से परेशान थे। क्वेटा में बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ रही थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, क्वेटा के कई घरों में पिछले छह महीने से नल के जरिए पानी नहीं पहुंचा था, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई। स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे नियमित रूप से वासा के बिलों का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। कई शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ और अधिकारियों की ओर से केवल मौखिक आश्वासन दिए गए।
--आईएएनएस
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