काबुल एयरस्ट्राइक पर पाकिस्तान सरकार की देश में घेराबंदी, नेताओं ने बताया अघोषित युद्ध
एथेंस, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हालिया एयरस्ट्राइक को लेकर पाकिस्तान सरकार को अपने ही देश में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान के कई राजनीतिक नेताओं और विधायकों ने संयुक्त बयान जारी कर इन हमलों को “अघोषित युद्ध” करार दिया है, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और घायल होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 16 मार्च को पाकिस्तान ने काबुल स्थित 2000 बेड वाले ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ पर हवाई हमले किए, जिसमें सैकड़ों नागरिकों की मौत और कई लोग घायल हुए।
‘ग्रीक सिटी टाइम्स’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस “अविवेकपूर्ण सैन्य कार्रवाई” को लेकर इस्लामाबाद सरकार की देश के भीतर कड़ी आलोचना हो रही है।
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि अफगान सरकार को अस्थिर करने की पाकिस्तान की कोशिशें “भ्रमित और अप्रभावी” हैं। वहीं, अवामी नेशनल पार्टी के नेता मियां इफ्तिखार हुसैन ने चेतावनी दी कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “युद्ध शुरू तो किया जा सकता है, लेकिन उसका अंत शुरू करने वाले के हाथ में नहीं होता।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की कार्रवाई को मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन मानते हुए “संभावित युद्ध अपराध” बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक गुल मोहम्मदुद्दीन मोहम्मदी ने हमलों की निंदा करते हुए कहा कि युद्ध में महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों की हत्या संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों, मानवाधिकारों और मानवीय मूल्यों के खिलाफ है।
पाकिस्तान का दावा है कि एयरस्ट्राइक आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर की गई थी और इसमें किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग और भयावह बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों में स्कूल, घर और मेडिकल सुविधाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
संयुक्त राष्ट्र मिशन की अधिकारी जॉर्जेट गैनन ने बताया कि प्रभावित केंद्र एक प्रसिद्ध पुनर्वास केंद्र था, जिसे अफगान सरकार संचालित करती थी। उन्होंने कहा कि मौके पर भारी तबाही देखी गई, जिसमें एक पूरा ब्लॉक नष्ट हो गया, जहां किशोरों का इलाज चल रहा था।
इस बीच, ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी इन हमलों को “गैरकानूनी” बताते हुए कहा कि यह संभावित रूप से युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है। ह्यूमन राइट्स वॉच की एशिया निदेशक पेट्रिशिया गोसमैन ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि नागरिकों से भरे चिकित्सा केंद्र को निशाना क्यों बनाया गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
--आईएएनएस
डीएससी