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पाकिस्तान की कोर्ट ने ईसाई लड़की को अगवा करने वाले को दी उसकी कस्टडी: रिपोर्ट

 

इस्लामाबाद, 30 जुलाई (आईएएनएस)। एक चौंकाने वाली घटना में, पाकिस्तान की एक अदालत ने 13 साल की ईसाई लड़की की कस्टडी उस मुस्लिम व्यक्ति को सौंप दी है, जिस पर उसे अगवा करने, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराने और शादी करने का आरोप है। ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

'वॉयस फॉर जस्टिस' संगठन के चेयरमैन जोसेफ जॉनसेन ने कहा, "यह फैसला तब सुनाया गया जब लड़की की उम्र का पता लगाने के लिए अदालत के आदेश से मेडिकल टेस्ट होना अभी बाकी था।"

जॉनसेन ने बताया कि फैसलाबाद के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज राणा सोहेल ने नाबालिग अंबर नदीम का हलफनामा स्वीकार कर लिया। इसमें उसने कहा कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया और आरोपी मोहसिन लियाकत से शादी की। उसने यह भी कहा कि उसे अगवा नहीं किया गया था। 'क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग लड़की का बयान दर्ज होने के बाद जज ने लियाकत को गिरफ्तारी के बाद जमानत दे दी।

'क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल' ने जॉनसेन के हवाले से कहा, "वह (लियाकत) 26 जून से न्यायिक हिरासत में था। इसके बाद अंबर आरोपी के रिश्तेदारों और वकीलों के साथ कोर्टरूम से चली गई, जबकि उसके गरीब माता-पिता इस गंभीर अन्याय को देखकर रोते हुए खड़े रहे।"

उन्होंने आगे बताया कि 27 जून को अंबर एक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई और कहा कि आरोपी के परिवार के सदस्यों ने उस पर दबाव डाला था कि वह झूठ बोले कि वह बालिग है। इसके बाद, आरोपी ने धर्म परिवर्तन और शादी का सर्टिफिकेट पेश किया, जिसमें अंबर की जन्मतिथि जून 2008 बताई गई थी, जबकि उसके माता-पिता की शादी 2012 में हुई थी। इससे दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।

जानसेन ने कहा, "इन बड़ी विसंगतियों को देखते हुए, मजिस्ट्रेट ने अंबर की उम्र का पता लगाने के लिए मेडिकल जांच का आदेश दिया और निर्देश दिया कि आगे की कार्यवाही तक उसे सरकारी शेल्टर होम में रखा जाए।"

'क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ता ने मेडिकल जांच होने से पहले ही लड़की की कस्टडी आरोपी को सौंपने और लियाकत को जमानत देने के सेशंस कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए।

इससे पहले इस महीने, यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की नाबालिग लड़कियों के अपहरण, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और बाल विवाह की निंदा की गई थी, साथ ही इस तरह के दुर्व्यवहार के व्यापक पैटर्न पर चिंता जताई गई थी।

यूरोपीय संसद के अनुसार, इस प्रस्ताव में खास तौर पर मारिया शाहबाज का मामला उठाया गया। मारिया पाकिस्तान की 13 साल की ईसाई लड़की है, जिसे मार्च 2026 में अगवा कर लिया गया था, उसका धर्म परिवर्तन कराया गया और अपहरण करने वाले व्यक्ति से जबरन उसकी शादी करा दी गई। यूरोपीय संसद के सदस्यों (एमईपी) ने इस बात पर जोर दिया कि उसे कानूनी मदद, परिवार से मिलने की सुविधा और मनोवैज्ञानिक सहायता मिलनी चाहिए।

2025 के संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के आंकड़ों का हवाला देते हुए, प्रस्ताव में कहा गया कि पाकिस्तान में शादी के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार होने वाली महिलाओं और लड़कियों में से लगभग 75 प्रतिशत हिंदू और 25 प्रतिशत ईसाई थीं।

यूरोपीय संसद ने कहा, " एमईपी की मांग है कि उसे कानूनी मदद, परिवार से मिलने की सुविधा और मनोवैज्ञानिक सहायता मिले। वे धार्मिक अल्पसंख्यकों की कम उम्र की लड़कियों के साथ होने वाले ऐसे अत्याचारों की निंदा करते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि उसका मामला पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों द्वारा झेले जा रहे मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन का एक उदाहरण है; 2025 में यूएन के आंकड़ों के अनुसार, शादी के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार होने वाली महिलाओं और लड़कियों में से लगभग 75 प्रतिशत हिंदू और 25 प्रतिशत ईसाई थीं।"

संसद ने आगे कहा, "संसद पाकिस्तान के अधिकारियों से आग्रह करती है कि वे बाल विवाह को खत्म करने के लिए देश के राष्ट्रीय ढांचे को पूरी तरह से लागू करें, जैसा कि देश के कुछ प्रांतों में पहले से ही हो रहा है, और अल्पसंख्यकों की अगवा की गई या जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार बनी लड़कियों के परिवारों की शिकायतों को सुनने के लिए एक राष्ट्रीय कानून या तंत्र का निर्माण करें।"

--आईएएनएस

केआर/