ओवैसी का आरोप- 'फॉर्म 7' के जरिए मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की रची जा रही साजिश
हैदराबाद, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने वोटर लिस्ट में सुधार के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि इसके तहत धोखाधड़ी से और बड़ी संख्या में आवेदन जमा करके मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की गहरी साजिश रची जा रही है।
हैदराबाद के सांसद ने तेलंगाना के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) सी. सुदर्शन रेड्डी से शिकायत की कि हैदराबाद के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों के नाम जान-बूझकर हटाने के लिए फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने सीईओ का ध्यान इस बात की ओर दिलाया कि उनके संसदीय क्षेत्र में आने वाले गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 के आवेदनों का साफ तौर पर गलत इस्तेमाल हुआ है, जिससे खास तौर पर मुस्लिम वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है।
सीईओ को लिखे एक पत्र में ओवैसी ने शिकायत की कि पोलिंग स्टेशन नंबर 28 पर थुडुमु जनार्दन ने 'फॉर्म-7' के 122 आवेदन जमा किए। उन्होंने कहा कि इन फॉर्म में उन वोटरों के नाम पहले से छपे हुए थे जिनके नाम हटाने की मांग की गई थी, जबकि आवेदन करने वाले ने 'फॉर्म 7' भरने वाले व्यक्ति के तौर पर अपना नाम और कॉन्टैक्ट नंबर लिखा था।
उन्होंने कहा, "जांच करने पर हमें पता चला कि 'फॉर्म-7' भरने वाला व्यक्ति भाजपा का समर्थक है। इससे यह साफ हो जाता है कि 'फॉर्म-7' का इस्तेमाल खास तौर पर मुस्लिम वोटरों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।"
ओवैसी ने बताया कि पोलिंग स्टेशन नंबर 173 पर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को 'फॉर्म-7' के करीब 30 आवेदन सौंपे गए थे। इन फॉर्म में आवेदन करने वाले का नाम नहीं लिखा था, जबकि जिन वोटरों के खिलाफ ये फॉर्म भरे गए थे, उनके नाम पहले से छपे हुए थे। उन्होंने फॉर्म स्वीकार न करने के लिए दोनों बीएलओ का शुक्रिया अदा किया।
हालांकि, उन्होंने सीईओ से अपील की कि वे 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950' की धारा 31 के तहत इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें।
ओवैसी ने सीईओ के उन निर्देशों का जिक्र किया, जो सभी ईआरओ को दिए गए थे। इन निर्देशों के तहत गलत जानकारी देने वाले आवेदकों के खिलाफ 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के अनुसार कार्रवाई की जानी थी।
ओवैसी ने एआईएमआईएम मुख्यालय दारुस्सलाम में मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'फॉर्म 7' के तहत जिन 122 नामों के लिए आवेदन किया गया था, वे सभी 2022 और 2026 की वोटर लिस्ट और हाल ही में जारी ड्राफ्ट रोल में शामिल थे। इनमें से कुछ लोगों को गड़बड़ियों के लिए नोटिस भेजा गया था और वे सुनवाई में शामिल भी हुए थे।
उन्होंने कहा, "ये सभी 122 वोटर मुसलमान हैं। 'फॉर्म-7' के लिए आवेदन कौन कर रहा है? मुसलमानों के प्रति यह नफरत क्यों है?"
ओवैसी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से उनकी पार्टी के मुख्यालय (जो गोशामहल निर्वाचन क्षेत्र में है) से एक हेल्प डेस्क चल रहा है, जो धर्म या जाति से परे हटकर वोटरों की मदद कर रहा है।
सांसद ने कहा कि बीएलओ की ईमानदारी और बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की सतर्कता की वजह से वे गोशामहल में ऐसी कोशिशों को नाकाम कर पाए, लेकिन उन्होंने आशंका जताई कि तेलंगाना के दूसरे हिस्सों में 'फॉर्म-7' का इसी तरह का गलत इस्तेमाल बिना किसी की नजर में आए हो सकता है।
उन्होंने मांग की कि भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई) उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे जो गलत 'फॉर्म-7' आवेदनों के जरिए किसी एक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
दिल्ली में ईसीआई ऑफिस तक इंडिया गठबंधन के सांसदों के विरोध मार्च के बारे में पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा कि वह वहां नहीं गए, क्योंकि वह उस गठबंधन का हिस्सा नहीं थे।
हालांकि, सांसद ने फिर कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) को चुनने की प्रक्रिया गलत है। उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से सरकार (कार्यपालिका) के पक्ष में है। इसे बदलने की जरूरत है।"
साथ ही, उन्होंने संबंधित कानून में संशोधन की मांग की ताकि सीईसी को चुनने के लिए पहले वाली व्यवस्था बहाल की जा सके, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश का एक पैनल शामिल होता था।
ओवैसी ने यह भी दोहराया कि एसआईआर गलत है। उन्होंने कहा कि एसआईआर पिछले दरवाजे से लाया गया एनआरसी है।
--आईएएनएस
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