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डेयरी किसानों को केसीसी का बड़ा सहारा, 5 साल में तीन गुना बढ़े लाभार्थी; भारत का दूध उत्पादन मांग से अधिक: मंत्री

 

नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मंगलवार को बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत संस्थागत ऋण प्राप्त करने वाले पशुपालन और डेयरी किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में जहां 15.08 लाख पशुपालक किसान इस योजना से लाभान्वित हो रहे थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 50.42 लाख पहुंच गई है। इससे स्पष्ट है कि पशुपालन क्षेत्र के किसानों की औपचारिक बैंकिंग और ऋण सुविधाओं तक पहुंच तेजी से बढ़ी है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों के कारण डेयरी क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका असर देश के दूध उत्पादन पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024-25 में भारत का कुल दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो देश की अनुमानित 243 मिलियन टन की घरेलू मांग से अधिक है। इससे भारत की डेयरी आत्मनिर्भरता और उत्पादन क्षमता का पता चलता है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय डेयरी उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में डेयरी उत्पादों का कुल निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो इस क्षेत्र की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।

राजीव रंजन सिंह ने आगे कहा कि दूध उत्पादन और पशुधन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) का विस्तार कर रही है। दिसंबर 2014 से संचालित इस योजना का उद्देश्य देशी पशु नस्लों का संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाना है।

सरकार का मानना है कि बेहतर नस्लों के विकास से प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। इसके साथ ही देशी नस्लों के संरक्षण से दीर्घकालिक पशुधन सुरक्षा और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी।

पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रजनन और बेहतर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) भी चला रही है। यह योजना वर्ष 2014-15 से लागू है।

मंत्री के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास और प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाना है। इसके तहत मांस, बकरी के दूध, अंडों और ऊन के उत्पादन में वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एनएलएम का मुख्य लक्ष्य असंगठित क्षेत्र में उपलब्ध पशुधन उत्पादों को संगठित बाजार से जोड़ना और उद्यमियों के लिए आगे एवं पीछे दोनों प्रकार की आपूर्ति शृंखला तैयार करना है।

केंद्र सरकार पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए भी व्यापक कदम उठा रही है। पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

इस योजना के तहत फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (पीपीआर) और क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) जैसी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बीमारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।

इसके अलावा, राज्यों को अन्य पशु रोगों के टीकाकरण, उभरती बीमारियों की रोकथाम, प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने, रोग निगरानी, प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए भी साझा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

--आईएएनएस

डीबीपी