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ऑपरेशन ट्राइडेंट में ईडी की बड़ी कार्रवाई, चार और आरोपी गिरफ्तार, अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क का खुलासा

 

आइजोल/इंफाल, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' के तहत चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूर्वोत्तर राज्यों में कई एजेंसियों द्वारा मिलकर चलाया जा रहा एक अभियान है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने शनिवार को बताया कि मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों से अंतरराष्ट्रीय हवाला लेनदेन का पता चला है।

ईडी के आइजोल उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने शुक्रवार को चार आरोपी लालराममुआना, थांगसिंटुआंग उर्फ ​​चिंटुआंग उर्फ ​​तलुआंगा, जब्रुल हक और अबू सालेह मोहम्मद सैफ उद्दीन को गिरफ्तार किया।

लालराममुआना मिजोरम के चम्फाई जिले का निवासी है। थांगसिंटुआंग उर्फ ​​चिंटुआंग उर्फ ​​तलुआंगा म्यांमार के बुलफेक गांव का निवासी है। जब्रुल हक और अबू सालेह मोहम्मद सैफ उद्दीन असम के श्रीभूमि जिले (पूर्व में करीमगंज जिला) के रहने वाले हैं।

सैफ उद्दीन को कृषिव एंटरप्राइज मामले में गिरफ्तार किया गया था, जबकि अन्य तीन को जब्रुल हक मामले में पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था।

ईडी के बयान में कहा गया है कि चारों आरोपी एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) के नारकोटिक्स मामलों में आइजोल की केंद्रीय जेल में बंद थे और उन्हें आइजोल के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-I के समक्ष पेशी वारंट पर पेश किया गया।

न्यायाधीश ने 29 अक्टूबर को जारी आदेशों के माध्यम से उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति दी और पूछताछ के लिए आरोपियों को 48 घंटे के लिए ईडी की हिरासत में सौंप दिया।

थांगसिंटुआंग म्यांमार स्थित 49.101 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन की खेप का आपूर्तिकर्ता है, जिसे 21 अगस्त, 2025 को जब्त किया गया था। वहीं लालराममुआना इसका मुख्य संचालक था, जब्रुल हक त्रिपुरा के दमछेरा-कन्हुमुन सीमा पर इसका लक्षित प्राप्तकर्ता था, और अबू सालेह करीमगंज स्थित संचालक था, जिसके खाते में 11.44 करोड़ रुपए आए, जिसमें 6.67 करोड़ रुपए नकद शामिल थे, और इसी रकम से चम्फाई हवाला खातों में पैसा जमा किया गया था।

बयान में कहा गया है कि इन गिरफ्तारियों के साथ, तीनों मामलों में अब तक दस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

23 अक्टूबर को मणिपुर के चुराचंदपुर जिले के न्यू लामका निवासी जेंगैहनियांग उर्फ ​​तानियांग के आवास पर तलाशी के दौरान कैश बुक, रजिस्टर और नोटबुक बरामद कर जब्त किए गए, जिनमें उसके हवाला कारोबार के हस्तलिखित खाते दर्ज थे। इन रिकॉर्डों से नियमित मुद्रा विनिमय और हवाला कारोबार का पता चलता है, जिसमें भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों से नकद और बैंक खातों में भारतीय रुपए प्राप्त किए जाते थे, जिन्हें प्रतिदिन लगभग 42 से 48 क्यात प्रति रुपए की दर से म्यांमार क्यात में परिवर्तित किया जाता था और म्यांमार में लोगों को भुगतान किया जाता था।

ईडी के बयान के अनुसार, एक दिन में 54.47 लाख रुपए (लगभग 26 करोड़ क्यात) तक की लेनदेन प्रविष्टियां दर्ज की गईं, कुल योग 43 करोड़ क्यात से अधिक हो गया। अप्रैल 2025 के एक सप्ताह के भीतर एक ही व्यक्ति को 1.14 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। खातों में अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच म्यांमार के मोबाइल वॉलेट केपे के माध्यम से किए गए हस्तांतरण और अमेरिकी डॉलर के रूपांतरण (4,150 क्यात प्रति डॉलर की दर से 10,816 डॉलर) का भी रिकॉर्ड है।

हवाला पेमेंट पाने वालों की पहचान के लिए टोकन के तौर पर इस्तेमाल किए गए, 10 रुपए के सात ऐसे नोट जब्त किए गए हैं, जिन पर कुछ लिखा हुआ है। साथ ही, जेंगैहनिआंग (उर्फ तानिआंग) के नाम पर 60 लाख रुपए में खरीदी गई एक अचल संपत्ति के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, चुराचांदपुर नेटवर्क से जुड़े 991 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।

'ड्रग्स के बदले सामान' गो अल्फा ट्रिप' के बही-खातों और उस मिनी-एटीएम काउंटर से पता चलता है कि आरोपी जेंगैहनिआंग ने बैंकिंग सिस्टम के जरिए 175 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम का लेनदेन किया। मिजोरम से जुड़े मामले के बयानों से भी यह साफ होता है कि ड्रग्स से कमाए गए पैसों को आम सामान खरीदने में खपाया जाता था।

इस काउंटर और मिजोरम के 'म्यूल' (बिचौलिए) खातों के जरिए कई सप्लायरों को भुगतान किया गया। इनमें पश्चिम बंगाल की एक आटा मिल, असम का खाद्य तेल व्यापारी, मिजोरम के फिलिंग स्टेशन (लगभग 2.61 करोड़ रुपए), किराने और दवाओं के थोक व्यापारी, तथा दिल्ली के जूते और कपड़े के व्यापारी शामिल हैं। हालांकि, इन सौदों के इनवॉइस आइजोल और चम्फाई, जोरिनपुई व तलाबुंग जैसे सीमावर्ती कस्बों की तीसरी पार्टियों के नाम पर बनाए गए थे, जहां से यह सामान म्यांमार भेजा जाता था।

इस तरह, सीमा पार बैठे ड्रग सप्लायरों को नकद के बजाय सामान के रूप में भुगतान किया जाता है। भारत में किए गए इस भुगतान को जीएसटी इनवॉइस की आड़ में छिपा दिया जाता है, और सीमा पार होने वाले इस लेनदेन का कोई वित्तीय सुराग (मनी ट्रेल) नहीं बचता।

ईडी ने बताया कि जब्त किए गए आपत्तिजनक दस्तावेजों में नाम आने वाले, भारत और म्यांमार के आर-पार सक्रिय लोगों की पहचान करने, सीमावर्ती कस्बों में सामान पाने वालों का पता लगाने, और अवैध लेनदेन के उन्हीं रास्तों से भुगतान पाने वाले सप्लायरों का पर्दाफाश करने के लिए आगे की जांच तेजी से चल रही है। साथ ही, अपराध से हासिल हुई अन्य रकम का पता लगाने और उसे अस्थायी रूप से जब्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी