ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 : 622 करोड़ रुपए का साइबर फ्रॉड पकड़ा गया, गुजरात में 40 लोग गिरफ्तार
गांधीनगर, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। गुजरात की सीआईडी क्राइम के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने बुधवार को बताया कि पिछले एक महीने में 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत 622 करोड़ रुपए से ज्यादा का साइबर फ्रॉड पकड़ा गया है और 40 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इस ऑपरेशन से एक ऐसे नेटवर्क का पता चला है, जो गैर-कानूनी पैसों को इधर-उधर करने के लिए 'म्यूल बैंक अकाउंट' (किराए के बैंक खाते) का इस्तेमाल करता था।
पुलिस ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान साइबर फ्रॉड की 1,039 शिकायतें भी सामने आईं और एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसमें 288 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन शामिल था।
अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने कमीशन लेकर अपने नाम से और दूसरों के नाम से बैंक खाते खुलवाए। उन्होंने इन खातों का इस्तेमाल अपने निजी फायदे के लिए किया, अपनी पहचान छिपाई और जान-बूझकर साइबर अपराधों से कमाए गए पैसों का लेन-देन किया।
ये पैसे बैंक खातों में जमा किए जाते थे, फिर उन्हें कैश में बदला जाता था और 'अंगड़िया' (हवाला) चैनलों के जरिए आगे भेजा जाता था। इस पूरे लेन-देन में आरोपी कमीशन कमाते थे और एक-दूसरे की मदद करते थे।
सीआईडी क्राइम ने बताया कि साइबर अपराधों में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए, सीआईडी क्राइम और रेलवे के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) केएलएन राव और पुलिस महानिरीक्षक (अपराध-4) बिपिन अहिर के निर्देशों पर यह सघन अभियान चलाया गया।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजदीपसिंह जाला, संजयकुमार केशवाला और विवेक भेड़ा की देखरेख और मार्गदर्शन में एक टीम बनाई गई। खास जानकारियों के आधार पर सूरत, भावनगर, राजकोट और ऊंझा में छापे मारे गए, जिसके बाद गिरफ्तारियां हुईं।
सूरत और भावनगर में पुलिस ने बताया कि एनसीसीआरपी पोर्टल पर बैंक खातों की जांच करने पर पता चला कि पूरे देश में साइबर फ्रॉड की 181 शिकायतें दर्ज हैं और अलग-अलग राज्यों में 81 एफआईआर दर्ज हैं। इन मामलों में अनुमानित तौर पर 1,74,63,70,855 रुपए (174.63 करोड़ रुपए) शामिल हैं।
इस मामले में दो आरोपियों मुकेश मेर (23) और फरीदखान पठान (22) को गिरफ्तार किया गया है। दोनों ही भावनगर के रहने वाले हैं। पुलिस ने चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया।
इन डिवाइस की जांच से 125 फर्मों की जानकारी, 65 लोगों के पहचान पत्र और 868 नकली इनवॉइस मिले।
ऊंझा में पुलिस ने बताया कि आरोपियों से मिले बैंक खातों की जानकारी 114 करोड़ रुपए से ज्यादा के साइबर फ्रॉड से जुड़ी थी, और 1930 पोर्टल पर पूरे देश में 125 मामले दर्ज किए गए थे।
दो आरोपियों, अक्षय पटेल और देवेंद्र पटेल को गिरफ़्तार किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि अक्षय ने अपने और फर्मों के नाम पर कई बैंक खाते खोले और फ़्रॉड से मिले पैसे निकालकर दूसरों को दे दिए, जबकि देवेंद्र ने दूसरे लोगों के जरिए अपने और दोस्तों के नाम पर खाते खोले और कमीशन कमाया। दो मोबाइल फोन जब्त किए गए।
राजकोट में पुलिस ने बताया कि एनसीसीआरपी पोर्टल पर जांच करने पर पूरे देश में साइबर फ्रॉड की 26 शिकायतें और अलग-अलग राज्यों में एक एफआईआर दर्ज मिलीं, जिनमें 59,79,345 रुपए (59.79 लाख रुपए) से ज्यादा की रकम शामिल थी।
चार आरोपियों चेतन अमलाणी (28), जतिन कक्कड़ (41), कपिल कोटक (34) और महेंद्र कोखिया (42) को गिरफ्तार किया गया। ये सभी राजकोट के रहने वाले हैं।
पुलिस ने बताया कि इन अपराधों में कई तरह के साइबर फ्रॉड जैसे ऑनलाइन फ़ाइनेंशियल फ्रॉड, इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड , यूपीआई से जुड़ा फ्रॉड, डीमैट और डिपॉजिटरी फ्रॉड, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और डिपॉज़िट फ्रॉड शामिल थे।
उनसे छह मोबाइल फोन और 40 लाख रुपए नकद जब्त किए गए।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने "एक-दूसरे की मदद करके, कमीशन पर अलग-अलग फर्मों के बैंक खाते गैर-कानूनी तरीके से हासिल किए, उनका इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया, अपनी पहचान छिपाई और जान-बूझकर साइबर क्राइम से मिले पैसे का लेन-देन किया।"
एक पब्लिक एडवाइजरी जारी करते हुए सीआईडी क्राइम ने कहा कि लालच या प्रलोभन में आकर अपनी बैंक खाते की जानकारी किसी के साथ शेयर न करें। खाते में आने वाले पैसे के लिए खाताधारक ही जिम्मेदार होता है। कमीशन के लिए अपना बैंक खाता किसी को न दें।
--आईएएनएस
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