'वन टू चा चा चा' रिव्यू : हंसी और पागलपन से भरी फिल्म, अशुतोष राणा बने सबसे बड़ी ताकत
आईएएनएस रेटिंग- 4 स्टार्स
रजनीश ठाकुर और अभिषेक राज खेमका के निर्देशन में बनी 'वन टू चा चा चा' एक ऐसी कॉमेडी फिल्म है, जो शुरू में ही दर्शकों के चेहरे पर हंसी लाती है और भरपूर मनोरंजन देती है। यह फिल्म बिना किसी झिझक के एक मसालेदार कमर्शियल एंटरटेनर बनने की कोशिश करती है और इसमें काफी हद तक सफल भी रहती है।
अभिषेक राज खेमका की कहानी और स्क्रीनप्ले फिल्म की मजबूत नींव हैं, वहीं दोनों निर्देशकों द्वारा लिखे गए डायलॉग्स फिल्म को ज्यादा मजेदार बनाते हैं। एक्शन, ड्रामा और कॉमेडी का ऐसा मिश्रण देखने को मिलता है, जो दर्शकों को आखिर तक बांधे रखता है।
फिल्म की शुरुआत से ही माहौल सेट होता है, लेकिन कहानी में असली मजा तब आता है जब आशुतोष राणा 'चाचा' के किरदार में स्क्रीन पर दिखाई देते हैं। उनकी एंट्री के साथ ही फिल्म एक नई रफ्तार पकड़ती है। आशुतोष राणा फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनका अभिनय दमदार, अजीबोगरीब और बेहद मजेदार है। लंबे समय बाद उन्हें इतने एंटरटेनिंग अंदाज में देखना दर्शकों के लिए खास अनुभव होगा। वह हर सीन में छा गए हैं और यह कहना गलत नहीं होगा कि फिल्म उनके कंधों पर टिकी हुई है। चाचा का किरदार सिर्फ कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि पूरी फिल्म को आगे बढ़ाने वाली ताकत है।
फिल्म की कॉमेडी उस समय और ज्यादा असरदार हो जाती है, जब ललित प्रभाकर, हर्ष मायर और अनंत विजय जोशी चाचा के साथ एक रोड ट्रिप पर निकलते हैं। यहीं से फिल्म में मजेदार सीन्स शुरू होते हैं। इस रोड ट्रिप के दौरान किरदारों की आपसी नोक-झोंक, उनकी टाइमिंग और परिस्थितियां मिलकर ऐसी कॉमेडी रचती हैं, जो दर्शकों को लगातार हंसाती रहती है। यह हिस्सा फिल्म को हल्का-फुल्का बनाता है।
इंटरवल से पहले फिल्म में एक अहम मोड़ आता है, जो कहानी को और ज्यादा रोमांचक बना देता है। इस हिस्से में मुकेश तिवारी एक पुलिस अफसर के रूप में और अभिमन्यु सिंह एक खतरनाक माफिया 'भूरा' के रोल में एंट्री लेते हैं। इन दोनों की मौजूदगी से फिल्म की कॉमेडी में थ्रिल का तड़का लगता है। यहां से फिल्म पूरी तरह से पागलपन भरी कॉमिक दुनिया में बदल जाती है, जहां हर किरदार अपनी अलग पहचान बनाता है। सेकेंड हाफ में भी फिल्म की रफ्तार कम नहीं होती और यह दर्शकों को लगातार हंसाती और चौंकाती रहती है।
लेखक अभिषेक राज खेमका ने ऐसी कहानी और स्क्रीनप्ले लिखा है जो हर वर्ग के दर्शकों को पसंद आता है। खास तौर पर युवा दर्शकों के लिए फिल्म में काफी कुछ है। फिल्म की कॉमेडी में कहीं न कहीं प्रियदर्शन की 'हेरा फेरी' और 'फिर हेरा फेरी', इंद्र कुमार की 'धमाल' और हाल की 'मडगांव एक्सप्रेस' जैसी फिल्मों की झलक मिलती है। इसी वजह से 'वन टू चा चा चा' खुद को साल की शुरुआती बड़ी मनोरंजक फिल्मों में शामिल करने का दावा करती है।
फिल्म के दूसरे हिस्से में नायरा एम बनर्जी की एंट्री होती है, जो कहानी को सहारा देती हैं। उनका किरदार फिल्म की कहानी में फिट बैठता है और वह अपनी भूमिका को ईमानदारी से निभाती हुई दिखाई देती हैं। तकनीक की बात करें तो फिल्म इस मोर्चे पर भी मजबूत नजर आती है। रणजीत बहादुर की एडिटिंग फिल्म को कसकर रखती है, जिससे कहानी कहीं भी खिंची हुई महसूस नहीं होती। अमोल गोले की सिनेमैटोग्राफी फिल्म के हर सीन को जीवंत बनाती है।
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर हर्षवर्धन रामेश्वर ने दिया है, जो पहले 'एनिमल' जैसी फिल्म में अपने काम के लिए सराहे जा चुके हैं। यहां भी उनका म्यूजिक फिल्म के मूड के साथ पूरी तरह मेल खाता है।
साजन गुप्ता, विजय लालवानी और नताशा सेठी द्वारा प्रोड्यूस की गई यह फिल्म शानदार बजट में बनाई गई है और इसका क्लाइमैक्स खास तौर पर ध्यान खींचता है। फिल्म का आखिरी हिस्सा पूरी तरह से पागलपन और भव्यता से भरा हुआ है, जो दर्शकों को 'हाउसफुल' जैसी बड़ी कॉमेडी फ्रेंचाइजी की याद दिलाएगा।
कुल मिलाकर, 'वन टू चा चा चा' एक ऐसी फिल्म है जो हंसी, मस्ती और एनर्जी से भरपूर है। आशुतोष राणा का शानदार अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है, जबकि बाकी कलाकार भी उनका बेहतरीन साथ देते हैं। यह फिल्म साबित करती है कि अगर कहानी और कॉमेडी सही ढंग से लिखी जाए और कलाकार पूरे मन से काम करें, तो दर्शकों को सिनेमाघरों में खींचा जा सकता है।
--आईएएनएस
पीके/एबीएम