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ओडिशा का नया 8,300 करोड़ रुपए का तटीय हाईवे प्रोजेक्ट आर्थिक विकास को देगा रफ्तार

 

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा के समुद्री तट पर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 8,300.79 करोड़ रुपए की लागत से 160.18 किलोमीटर लंबे रामेश्वर–पारादीप तटीय राजमार्ग से क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी। यह जानकारी सरकार की ओर से रविवार को जारी एक फैक्टशीट में दी गई।

तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार इस प्रोजेक्ट में रामेश्वर से कोणार्क तक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे और कोणार्क से पारादीप तक एक 2-लेन हाईवे बनाया जाएगा। इस मार्ग का डिजाइन 100 किलोमीटर प्रति घंटा से वाहन चालने के लिए किया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 30 मिनट कम होने की उम्मीद है, जिससे यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन भी अधिक सुगम होगा।

पीएम गतिशक्ति के अनुरूप यह प्रोजेक्ट 9 इकोनॉमिक नोड्स और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों को जोड़ेगी, जिससे ओडिशा के आर्थिक नेटवर्क को और मजबूती मिलेगी। इसके अलावा यह पारादीप बंदरगाह, पुरी रेलवे स्टेशन, प्रस्तावित पुरी हवाई अड्डे और अन्य क्षेत्रीय आर्थिक केंद्रों तक पहुंच को भी बेहतर बनाएगी।

यह राजमार्ग खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे सांस्कृतिक, धार्मिक, पर्यटन और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित होगा।

यह कॉरिडोर विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर (पुरी), ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर और श्रद्धेय रामचंडी मंदिर के बीच बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगा, जिससे हर वर्ष ओडिशा आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की तीर्थयात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।

बेहतर सड़क अवसंरचना से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव भी मिलेगा। क्षेत्र में विकसित हो रही नई हवाई अड्डा अवसंरचना ओडिशा को एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में और मजबूत करेगी, जिससे देश-विदेश के यात्रियों के लिए यहां पहुंचना आसान होगा।

रामेश्वर–पारादीप कॉरिडोर ओडिशा के पूर्वी समुद्री तट पर समुद्र तटों, विरासत स्थलों, जैव विविधता वाले क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़ते हुए एक नए तटीय पर्यटन प्रवेश द्वार के रूप में उभरेगा।

पुरी, कोणार्क और पारादीप के बीच बेहतर संपर्क से ये सभी स्थान एकीकृत पर्यटन सर्किट का हिस्सा बन जाएंगे, जहां पर्यटकों को आध्यात्मिक विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला, समुद्र तटों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का समग्र अनुभव मिलेगा।

यह हाईवे बीच पर्यटन, ईको-टूरिज्म और प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देगा। साथ ही, वन्यजीव क्षेत्रों और प्रसिद्ध गाहिरमाथा कछुआ प्रजनन स्थलों जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्रों तक पहुंच भी आसान बनाएगा।

बेहतर संपर्क से सस्टेनेबल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे ओडिशा की अनूठी तटीय जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। पर्यटक प्राकृतिक स्थलों तक अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे और जिम्मेदार पर्यटन मॉडल को समर्थन मिलेगा, जो नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में सहायक होंगे।

यह नया हाईवे स्थानीय समुदायों के लिए भी नए अवसर पैदा करेगा। इसके चलते मार्ग के किनारे होटल, होमस्टे, रेस्तरां, हस्तशिल्प बाजार और पर्यटन आधारित कारोबार के विकास को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।

--आईएएनएस

एबीएस