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ग्यारह सालों में पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क लगभग 12 बार बढ़ाया गया: पवन खेड़ा

 

नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती के फैसले पर शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं की राय अलग-अलग थी।

कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि किसी भी तरह की राहत का स्वागत है, लेकिन उन्होंने एक 'व्यापक कार्यक्रम' की मांग की। वहीं, पार्टी नेता पवन खेड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि यह कटौती तेल विपणन कंपनियों के लिए है, न कि उपभोक्ताओं के लिए।

पश्चिम एशिया संघर्ष और उसके परिणामस्वरूप होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार का यह कदम आया है। इस बीच खेड़ा ने पूछा कि यह मूल्य कटौती किसके लिए है?

खेड़ा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह कटौती किसके लिए है? यह कटौती तेल विपणन कंपनियों के लिए है, जिनमें से कुछ निजी हैं और कुछ सरकारी है। लेकिन यह उपभोक्ता के लिए नहीं। आज अगर आप पेट्रोल भरवाने जाएं, तो देखें कि कीमत में वास्तव में कितनी कमी आई है। उपभोक्ता के लिए एक पैसा भी कम नहीं हुआ है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर ईंधन पर उत्पाद शुल्क कई बार बढ़ाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने (केंद्र सरकार ने) पिछले साढ़े ग्यारह वर्षों में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क लगभग 12 बार बढ़ाया है।

सरकार ने शुक्रवार को कहा कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा पंप मूल्यों में कोई बदलाव नहीं होगा और उत्पाद शुल्क में कटौती का लाभ पंप पर सीधे तौर पर नहीं दिया जा रहा है।

कांग्रेस सांसद उज्जवल रमण सिंह ने कहा कि देश की जनता का मानना ​​है कि जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो घरेलू कीमतें भी उसी अनुपात में कम होनी चाहिए। पिछले 12 वर्षों में, जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब भारत में डीजल, पेट्रोल और एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें क्यों नहीं घटाई गईं?

उन्होंने आईएएनएस से ​​कहा कि यह एक बड़ा मुद्दा है। मेरा मानना ​​है कि सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

--आईएएनएस

एमएस/