ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण में बड़ी सफलता, पर्यावरण मंत्री ने कहा-'वैज्ञानिकों की तारीफ के लिए कम हैं शब्द'
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वैज्ञानिकों, डॉ. सुतीर्थ दत्ता, डॉ. तुषना करकरिया और ऋषिका शर्मा की तारीफ की। उन्होंने राजस्थान में 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' को जंगल में छोड़े जाने के दौरान इन वैज्ञानिकों को भावुक होते देखा था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भूपेंद्र यादव ने पोस्ट किया, "जब राजस्थान के सैम, डेजर्ट नेशनल पार्क में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स को जंगल में छोड़ा गया, तो डॉ. सुतीर्थ दत्ता, डॉ. तुषना करकरिया और ऋषिका शर्मा भावुक हो गए। कोई सोच भी सकता है कि कैसे कुछ लोग निस्वार्थ कामों के लिए अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर देते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "उनकी और उस पूरी टीम की तारीफ के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे, जिन्होंने इसे मुमकिन बनाया है।" इससे पहले दिन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के जैसलमेर में सैम डेजर्ट नेशनल पार्क में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स को आजाद किया।
बस्टर्ड्स को छोड़ने के बाद केंद्रीय मंत्री ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "एक अहम कदम उठाते हुए, रविवार सुबह जैसलमेर के सैम, डेजर्ट नेशनल पार्क में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स को आजाद किया गया। यह बड़ी कामयाबी हमारे वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और ग्राउंड स्टाफ़ की लगभग एक दशक की अटूट लगन से मुमकिन हो पाई है, जिन्होंने जीआईबी को राजस्थान के रेगिस्तान में वापस लाने के लिए सालों तक काम किया है।"
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का भी उनके मार्गदर्शन, हौसला-अफजाई और लगातार समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया। "मैं पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने लगातार मार्गदर्शन, हौसला-अफजाई और समर्थन दिया, जिससे हमारी वैज्ञानिक कम्युनिटी जीआईबी समेत सभी प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम कर सके।"
इससे पहले शनिवार को केंद्रीय मंत्री यादव ने रामदेवरा में ब्रीडिंग सेंटर का दौरा किया और इस खास प्रजाति के संरक्षण के लिए काम कर रहे युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की कोशिशों की तारीफ की।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "कैप्टिव-ब्रीडिंग (संरक्षित माहौल में प्रजनन) से पैदा हुए जीआईबी को आजाद करना प्रजाति को बचाने के प्रोग्राम का अगला अहम कदम है। इससे कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा हुए पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस लाने के प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने और विकसित करने के लिए जरूरी वैज्ञानिक जानकारी मिलेगी।"
इस प्रोग्राम में कैप्टिव ब्रीडिंग और संरक्षण की कोशिशें शामिल हैं, जिनका मकसद जीआईबी की स्थिति को बेहतर बनाना और आखिर में कैप्टिव-ब्रीडिंग से पैदा हुए पक्षियों को जंगल में वापस भेजना है।
--आईएएनएस
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