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बागी नेताओं पर एआईएडीएमके का रुख सख्त, संगठन में पद लौटाने के मूड में नहीं पलानीस्वामी

 

चेन्नई, 15 जून (आईएएनएस)। एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी उन बागी विधायकों और नेताओं को संगठनात्मक पद वापस देने के पक्ष में नहीं हैं, जिनसे विधानसभा में विश्वास मत के दौरान सत्तारूढ़ टीवीके सरकार का समर्थन करने के बाद उनकी जिम्मेदारियां छीन ली गई थीं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इसके संकेत दिए हैं।

विधानसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन और पार्टी के अलग-अलग स्तरों पर नेताओं के बागी होने के बाद एआईएडीएमके फिर से संगठित होने की कोशिश कर रही है। के. पलानीस्वामी भी संगठन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने और विरोध को उभरने से रोकने के प्रयासों में जुटे हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि चुनावी हार और विधानसभा में पार्टी के तीसरे स्थान पर खिसकने के कारण कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने राजनीतिक भविष्य पर फिर से विचार करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद पलानीस्वामी ने आत्मविश्वास दिखाया है और संगठन के भीतर अपना अधिकार मजबूत करने की कोशिश की है।

हाल के हफ्तों में एआईएडीएमके प्रमुख ने बागी खेमे से जुड़े कई नेताओं के साथ सुलह करने के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत छीने गए संगठनात्मक पदों को वापस देने के मामले में उन्होंने एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींच दी है। पार्टी नेतृत्व का मानना ​​है कि ऐसे नेताओं को बहाल करने से आंतरिक अनुशासन कमजोर हो सकता है और पार्टी के भीतर प्रभाव के प्रतिस्पर्धी केंद्र बन सकते हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पलानीस्वामी इस बात को लेकर भी सचेत हैं कि ऐसे कदम से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच क्या संदेश जाएगा। पार्टी नेतृत्व को खुलेआम चुनौती देने वाले पदाधिकारियों को बहाल करने को अनुशासनहीनता को इनाम देने के तौर पर देखा जा सकता है और इससे जनरल सेक्रेटरी का अधिकार कमजोर हो सकता है। फिलहाल, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बात के बहुत कम संकेत हैं कि हटाए गए नेताओं को उनकी पुरानी संगठनात्मक भूमिकाएं वापस मिलेंगी।

पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि को मुख्यालय सचिव के पद से हटाया गया था। वहीं सीवी शनमुगम से संगठन सचिव और विलुप्पुरम जिला सचिव के पद वापस ले लिए गए थे। हालांकि अधिकांश असंतुष्ट नेताओं को सुलह प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है, लेकिन शनमुगम अभी भी नेतृत्व की पहल से काफी हद तक अलग-थलग बने हुए हैं।

गौरतलब है कि एआईएडीएमके तमिलनाडु के हालिया विधानसभा चुनाव में सिर्फ 47 सीटें ही जीत पाई। इसके कारण मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर उसकी लंबे समय से चली आ रही स्थिति भी छिन गई।

--आईएएनएस

डीसीएच/