भारत में 4 साल 60 दिनों से ईंधन की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं: हरदीप पुरी
सूरत, 1 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को 4 साल 60 दिनों तक स्थिर बनाए रखा है।
वह सूरत में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) - साउथ गुजरात को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में केंद्र और राज्य के मंत्री, राजनयिक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन वाइब्रेंट गुजरात पहल के तहत राज्य के क्षेत्रीय विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा था।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य युद्ध, सप्लाई चेन में रुकावट और भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित रहा है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट का तनाव भी शामिल है। इसके बावजूद भारत स्थिर बना रहा।
उन्होंने कहा कि भारत में खुदरा ईंधन कीमतों में 4 साल 60 दिनों से बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके उलट, पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई, जो कुछ जगहों पर 39 से 66 फीसदी तक रही। वहां ईंधन की कमी, राशनिंग और कामकाज के सीमित घंटों जैसी समस्याएं भी देखने को मिलीं।
पुरी ने कहा कि भारत ने जानबूझकर घबराहट या जल्दबाजी में नीति नहीं बनाई। उन्होंने कहा, ''सरकार ने घबराहट को नीति नहीं बनने दिया। कई चुनावी दौर के बावजूद आर्थिक स्थिरता बनाए रखी गई।'' उन्होंने यह बातें सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती पर हुई चर्चा के दौरान कहीं।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा तथा रक्षा निर्माण में सूरत के औद्योगिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा,''इस क्षेत्र के उद्योगों ने देश की कई बड़ी परियोजनाओं में योगदान दिया है। जम्मू-कश्मीर में चिनाब रेल ब्रिज के निर्माण में एएम/एनएस का स्टील इस्तेमाल हुआ है।''
उन्होंने यह भी कहा कि एलएंडटी की हजीरा इकाई में बने के9 वज्र तोप सिस्टम भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। सूरत के उद्योगों ने चिनाब रेल ब्रिज और आधुनिक रक्षा प्रणालियों जैसी देश की ऐतिहासिक परियोजनाओं में अहम योगदान दिया है।
जल प्रबंधन पर उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के जरिए 70 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई हैं, जिससे करीब 2 अरब घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित हुई है।
उन्होंने कहा, ''देश में 83 फीसदी पानी का कृषि, 14 फीसदी घरेलू जरूरतों और 2.5 फीसदी पानी का उद्योगों में उपयोग होता है। उद्योगों को टिकाऊ तरीके अपनाने होंगे और भूजल का अत्यधिक दोहन रोकना होगा।''
उन्होंने यह भी बताया कि सूरत नगर निगम शोधित (ट्रीटेड) पानी की बिक्री से हर साल 300 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई करता है। उन्होंने कहा कि शहर ने अगले 50 वर्षों की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना तैयार की है।
--आईएएनएस
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