उत्तर प्रदेश के बहराइच में 2017 के अफीम तस्करी मामले में नेपाली महिला दोषी पाई गई
लखनऊ, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में 2017 में हुई अफीम जब्ती के मामले में एक नेपाली महिला को दोषी ठहराया है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बहराइच के तीसरे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मंगलवार को नेपाल के सरलाही जिले की निवासी 31 वर्षीय सुनीता पुन को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के तहत 12 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।
यह मामला 3 मई, 2017 का है, जब एनसीबी की लखनऊ क्षेत्रीय इकाई की एक टीम ने विशिष्ट खुफिया सूचनाओं के आधार पर बहराइच में भारत-नेपाल सीमा पर रूपाईडीहा स्थित एसएसबी चेक पोस्ट पर निगरानी रखी थी। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की सहायता से यह अभियान चलाया गया।
सीमा निगरानी के दौरान, भारत में पैदल प्रवेश कर रही आरोपी को रोका गया और उसकी तलाशी ली गई। अधिकारियों ने 2.502 किलोग्राम अफीम बरामद की। पकड़े जाने से बचने के प्रयास में उसने अफीम को चतुराई से अपनी जांघ पर छिपा रखा था।
जांच से पता चला कि अफीम नेपाल के बांके जिले से लाई गई थी और इसे अवैध बिक्री और वितरण के लिए बहराइच ले जाया जा रहा था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता पर जोर देते हुए जब्त की गई नशीले पदार्थों की व्यावसायिक मात्रा और मादक पदार्थों की तस्करी से होने वाले व्यापक सामाजिक नुकसान को उजागर किया।
मामले के साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच करने के बाद, अदालत ने पाया कि आरोपी जानबूझकर नशीले पदार्थों को बेचने के इरादे से अपने कब्जे में रखे हुए था और तदनुसार सजा सुनाई।
एनसीबी ने कहा कि यह दोषसिद्धि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ उसकी जीरो टोलरेंस नीति और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की उसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।
नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे नशीले पदार्थों की तस्करी से संबंधित जानकारी मानस हेल्पलाइन (1933) के माध्यम से दें, सूचना देने वालों की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।
--आईएएनएस
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