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चीन के साथ नेपाल का बढ़ता व्यापार घाटा चिंता का विषय, बीआरआई परियोजनाएं बढ़ा रहीं आर्थिक असमानता

 

नई दिल्ली, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल चीन के साथ लगातार बढ़ते व्यापार घाटे का सामना कर रहा है, क्योंकि वह पड़ोसी देश से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, वाहन और वस्त्र जैसी वस्तुओं का बड़े पैमाने पर आयात करता है, जबकि इसके मुकाबले उसका निर्यात बहुत कम है।

इस असमानता की स्थिति काफी स्पष्ट है। यूरेशिया रिव्यू में प्रकाशित लेख के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में नेपाल का चीन से आयात 195 अरब रुपए से अधिक रहा, जबकि चीन को उसका निर्यात इसके मुकाबले बहुत ही कम रहा।

लेख में यह भी बताया गया है कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) (जिसमें नेपाल 2017 में औपचारिक रूप से शामिल हुआ था) दोनों देशों के बीच इस संरचनात्मक असंतुलन को और मजबूत करता है। विश्व बैंक के शोध के अनुसार, वैश्विक स्तर पर चीन द्वारा वित्तपोषित बीआरआई परियोजनाओं में 60 प्रतिशत से अधिक ठेके चीनी कंपनियों को दिए जाते हैं, जबकि गैर-चीनी संस्थानों द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं में यह आंकड़ा लगभग 30 प्रतिशत है।

नेपाल की निर्माण कंपनियां अक्सर अपने ही देश की परियोजनाओं में सीमित भूमिका निभाती हैं, जबकि उपकरण आपूर्ति और विशेष इंजीनियरिंग कार्यों के ठेके चीनी कंपनियां हासिल कर लेती हैं।

लेख में कहा गया है, “नेपाल का विनिर्माण क्षेत्र क्षेत्रीय मानकों के मुकाबले छोटा है। औद्योगिक उत्पादन मुख्य रूप से खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र और कुछ निर्माण सामग्री तक सीमित है। जिन क्षेत्रों में चीनी आयात के साथ प्रतिस्पर्धा होती है, वहां नेपाली उत्पादकों की बाजार हिस्सेदारी घटती जा रही है। यह आंशिक रूप से प्रतिस्पर्धात्मकता की समस्या है और आंशिक रूप से नीति से जुड़ी समस्या है, क्योंकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के तहत आने वाली चीनी पूंजी घरेलू बाजार में चीनी प्रतिस्पर्धा भी लेकर आती है।”

नेपाल के केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय दोनों ने अपनी सार्वजनिक योजनाओं में चीन पर आयात निर्भरता को एक संरचनात्मक जोखिम के रूप में चिन्हित किया है। इस स्थिति से निपटने के लिए या तो नेपाल को अपने आयात स्रोतों में विविधता लानी होगी, जिसके लिए नए व्यापार समझौते और आपूर्ति शृंखला का विकास जरूरी है या फिर आयात प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाना होगा, जिसके लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश और कौशल विकास की जरूरत है जिसे नेपाल फिलहाल अपने संसाधनों से पूरा करने में सक्षम नहीं है।

लेख में आगे कहा गया है कि इन दोनों ही विकल्पों के लिए चीनी पूंजी उपलब्ध है, लेकिन शर्तें अंततः फिर उसी स्थिति की ओर ले जाती हैं।

--आईएएनएस

एवाई/वीसी