×

मणिपुर को मिला नया डीजीपी, लद्दाख पुलिस प्रमुख मुकेश सिंह संभालेंगे जिम्मेदारी

 

नई दिल्ली/इंफाल, 22 मई (आईएएनएस)। लद्दाख के मौजूदा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सिंह मणिपुर के नए पुलिस प्रमुख बनने जा रहे हैं।

यह बदलाव तब हुआ है, जब मौजूदा डीजीपी राजीव सिंह को कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) के पद पर नियुक्त किया गया है।

कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने मुकेश सिंह को तीन साल की अवधि के लिए इंटर-कैडर डेपुटेशन पर मणिपुर भेजने को मंजूरी दे दी है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह फैसला 15 मई को गृह मंत्रालय से मिले एक प्रस्ताव के बाद किया गया।

मुकेश सिंह, एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है और 1996 में आईपीएस में शामिल हुए थे। उन्होंने 15 जनवरी 2026 को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के डीजीपी का कार्यभार संभाला था।

इससे पहले, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कई संवेदनशील पदों पर काम किया है, जिसमें आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़े अभियानों के दौरान रियासी, पुलवामा, पुंछ और जम्मू में पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवाएं देना शामिल है।

इस बीच, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के एक अन्य आदेश के अनुसार, एसीसी ने राजीव सिंह को कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) के पद पर नियुक्त करने को भी मंजूरी दे दी है।

त्रिपुरा कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव सिंह 1 जून 2023 से मणिपुर के डीजीपी के रूप में कार्यरत हैं। राज्य (मणिपुर) के पुलिस प्रमुख का कार्यभार संभालने से पहले, उन्होंने त्रिपुरा में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के रूप में और बाद में नई दिल्ली स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय में महानिरीक्षक (अभियान) के रूप में सेवाएं दी थीं।

3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद राज्य के सबसे अशांत दौर में से एक के दौरान उन्होंने मणिपुर पुलिस के प्रमुख का पदभार संभाला। यह जातीय हिंसा पहाड़ी जिलों में आदिवासी संगठनों द्वारा आयोजित 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के बाद शुरू हुई थी। यह मार्च मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में किया गया था।

इस जातीय संघर्ष में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है। हजारों लोग विस्थापित हुए हैं और पहाड़ी व घाटी, दोनों जिलों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस लंबे समय तक चली अशांति के कारण राज्य में लगभग एक वर्ष के लिए राष्ट्रपति शासन भी लागू करना पड़ा।

मणिपुर 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन के अधीन रहा, जिसे इस वर्ष 4 फरवरी को राज्य में नई भाजपा-नीत सरकार के गठन से ठीक कुछ घंटे पहले हटा लिया गया।

इसके बाद भाजपा-नीत एनडीए विधायक दल के नेता युमनम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

अधिकारियों ने बताया कि एक नए डीजीपी की नियुक्ति का विशेष महत्व है, क्योंकि राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां ​​हिंसा प्रभावित राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी