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मध्य प्रदेश: महिला जेल अधिकारी ने आजीवन कारावास की सजा काट चुके पूर्व कैदी से शादी की

 

भोपाल, 7 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुशनगर में एक असाधारण प्रेम कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा है। सतना केंद्रीय जेल में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर कार्यरत फिरोजा नाम की एक मुस्लिम महिला ने हत्या के दोषी एक हिंदू व्यक्ति से शादी कर ली है।

सूत्रों के अनुसार, 5 मई को हुई यह शादी वैदिक मंत्रों और पूर्ण हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। दुल्हन रीवा की निवासी हैं और सतना केंद्रीय जेल में सहायक जेल अधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे वारंट संबंधी कर्तव्यों के लिए जिम्मेदार थीं।

दूल्हा धर्मेंद्र सिंह चंदला एक हाई-प्रोफाइल हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट चुका था। जेल में रहने के दौरान, वह अपने अच्छे आचरण के लिए जाने जाते थे और अक्सर प्रशासनिक कार्यों में सहायता करते थे, जिससे उनका फिरोजा से नियमित संपर्क बना रहा। समय के साथ, उनके पेशेवर संबंध मित्रता में परिवर्तित हुए और अंततः प्रेम में बदल गए।

फिरोजा के परिवार के विरोध के बावजूद, दंपति ने शादी करने का फैसला किया। उनके किसी भी रिश्तेदार ने समारोह में भाग नहीं लिया, और उनकी अनुपस्थिति में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे हिंदू संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं ने कन्यादान की रस्म पूरी की।

विवाह पूरी तरह से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ, जिसमें दंपति ने सात फेरों के माध्यम से आजीवन सहजीवन का वचन लिया।

धर्मेंद्र सिंह के अतीत की बात करें तो 2007 में, उन्हें चंदला नगर परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। लगभग 14 साल जेल में बिताने के बाद, उन्हें अच्छे आचरण के आधार पर चार साल पहले रिहा कर दिया गया।

इस विवाह से इलाका में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है, न केवल इसलिए कि यह अंतरधार्मिक विवाह है, बल्कि इसलिए भी कि एक जेल अधिकारी का एक पूर्व कैदी से विवाह करना एक असामान्य परिस्थिति है।

जहां कुछ निवासी इस रिश्ते को प्रेम की सीमाओं से परे होने का प्रमाण मानते हैं, वहीं कुछ अन्य लोगों ने इस अपरंपरागत गठबंधन पर चिंता व्यक्त की है।

फिलहाल, इस जोड़े द्वारा अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के फैसले ने उनकी कहानी को इस क्षेत्र की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बना दिया है, जो सामाजिक मानदंडों की अवहेलना और व्यक्तिगत पसंद की शक्ति दोनों का प्रतीक है।

--आईएएनएस

एमएस/