ट्विशा शर्मा केस: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जज गिरिबाला को जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना हटाने का दिया निर्देश
जबलपुर/भोपाल, 30 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार को रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह के वकीलों को उनकी नियमित जमानत याचिका से दहेज प्रताड़ना से जुड़े संदर्भ हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की आत्महत्या के मामले में सीबीआई जांच के दौरान उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना के आरोप को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला।
अदालत ने फिलहाल गिरिबाला सिंह को जमानत नहीं दी है। वह इस मामले में अभी हिरासत में हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की अदालत में गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया गया।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को अपनी जांच के नतीजों और चार्जशीट में लगाए गए आरोपों की जानकारी दी। एजेंसी ने गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु का आरोप हटा दिया है। इसकी जगह उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है।
गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका उस समय दाखिल की गई थी, जब उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु का मामला था। सीबीआई की चार्जशीट आने और आरोपों में बदलाव के बाद उनके वकील ने अदालत को बताया कि अब मामले की प्रकृति बदल गई है।
इसके बाद हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह के वकीलों से जमानत याचिका में संशोधन करने और उसमें दहेज प्रताड़ना से जुड़े संदर्भ हटाने को कहा, क्योंकि सीबीआई को अपनी जांच में उनके खिलाफ इस आरोप के समर्थन में सबूत नहीं मिले।
हालांकि, सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को कथित तौर पर ताने देकर और परेशान करके आत्महत्या के लिए उकसाया। इसी आधार पर सीबीआई ने दहेज मृत्यु की धारा की जगह बीएनएस की धारा 108 लगाई है।
33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मायके वालों ने ट्विशा के पति और ससुराल पक्ष के लोगों पर आरोप लगाए थे। इसके बाद सीबीआई ने मामले की परिस्थितियों की जांच की और चार्जशीट दाखिल की।
गिरिबाला सिंह ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने अपनी जमानत याचिका में दावा किया कि ट्विशा डिप्रेशन से जूझ रही थीं। उन्होंने दहेज से जुड़े आरोपों को भी झूठा बताया है।
ट्विशा के पिता ने गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका का विरोध किया है।
इससे पहले 15 मई को भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे दी थी। इसके बाद राज्य सरकार और ट्विशा के माता-पिता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट ने 27 मई को उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद से गिरिबाला सिंह हिरासत में हैं और भोपाल की अदालत ने अलग-अलग मौकों पर उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाई है।
अब हाई कोर्ट संशोधित जमानत याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग पांडे ने आईएएनएस से कहा कि परिवार अगली सुनवाई में इस विशेष बिंदु पर दोबारा जांच की मांग कर सकता है।
--आईएएनएस
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