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पश्चिम बंगाल: एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग को पूरी स्वतंत्रता होती तो हटाए जा सकते थे और भी नाम: भाजपा

 

कोलकाता, 28 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल भाजपा ने शनिवार को दावा किया कि अगर भारत निर्वाचन आयोग को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान पूरी स्वतंत्रता के साथ चलाने की अनुमति दी गई होती, तो राज्य की मतदाता सूची से और भी अधिक नाम हटाए जा सकते थे।

अंतिम मतदाता सूची जारी होने पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने आरोप लगाया कि वर्षों से मतदाता सूची में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के साथ-साथ मृत व्यक्तियों के नाम भी शामिल थे।

देबजीत सरकार ने आईएएनएस से कहा, “ऐसा होना तय था, क्योंकि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में वर्षों से अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम तथा मृत मतदाताओं के नाम भरे हुए थे। आज भारत निर्वाचन आयोग ने ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए हैं।”

शनिवार को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार अब तक 61,78,245 नाम हटाए जा चुके हैं।

देबजीत सरकार ने आगे आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “अगर निर्वाचन आयोग को पूरी स्वतंत्रता दी गई होती, तो और भी ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जाते। यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक साजिश थी, ताकि एसआईआर प्रक्रिया को पटरी से उतारा जा सके और लोगों को गुमराह किया जा सके।”

निर्वाचन आयोग के अनुसार हटाए गए मतदाताओं की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि लगभग 60 लाख मतदाताओं के पहचान दस्तावेज फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर नियुक्त अधिकारियों द्वारा न्यायिक जांच के अधीन हैं।

इससे पहले दिन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि अंतिम सूची में “स्वीकृत” मतदाताओं की कुल संख्या 7,04,59,284 है।

उन्होंने कहा, “जब पिछले साल नवंबर में एसआईआर शुरू हुआ था, तब कुल मतदाताओं की संख्या 7,66,37,529 थी। यह घटकर 7,08,16,630 रह गई। अब अंतिम मतदाता सूची में ‘स्वीकृत’ मतदाताओं की संख्या 7,04,59,284 है। इसका मतलब है कि इस प्रक्रिया में अब तक कुल 61,78,245 मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं।”

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी