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‘मिशन स्नेहजोरी’ से मजबूत होगा असम का मूगा रेशम उद्योग: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा

 

नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल ‘मिशन स्नेहजोरी’ असम के पारंपरिक मूगा रेशम उद्योग को नई मजबूती देगी और इससे जुड़े किसानों तथा बुनकरों की आजीविका में सुधार होगा।

केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) लगातार पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रहा है।

उन्होंने बताया कि 400 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली ‘मिशन स्नेहजोरी’ परियोजना की शुरुआत असम के विश्वप्रसिद्ध मूगा रेशम उद्योग के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से की गई है। यह मिशन सदियों पुरानी इस पारंपरिक कला से जुड़े किसानों, बुनकरों और कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए तैयार किया गया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य मूगा रेशम के उत्पादन और विपणन के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। इसके तहत कारीगरों और किसानों को संगठित समूहों में जोड़ा जाएगा। परियोजना के अंतर्गत राज्यभर में 1,180 किसान हित समूह (एफआईजी) और 30 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किए जाएंगे।

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मिशन के तहत डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम और कड़े भौगोलिक संकेतक (जीआई) प्रमाणीकरण उपाय लागू किए जाएंगे। इससे वैश्विक खरीदारों को असम के मूगा रेशम और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रामाणिकता सत्यापित करने में आसानी होगी।

उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली "डबल इंजन सरकार" की सोच का परिणाम है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विकास को गति दे रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य असम की पारंपरिक पहचान और स्वदेशी शिल्पकला को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना है। इसके तहत खाड़ी देशों, जापान और अन्य वैश्विक बाजारों में मूगा रेशम उत्पादों को बढ़ावा देने की योजना है।

उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहलें असम की विरासत से जुड़े उद्योगों को संरक्षित करने के साथ-साथ कारीगरों और ग्रामीण समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के नए अवसर भी पैदा करेंगी।

--आईएएनएस

डीएससी