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दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण से निपटने के लिए स्टार्टअप्स प्रतिनिधियों के साथ बैठक, एआई समाधानों पर जोर

 

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए काम कर रहे स्टार्टअप्स और नवाचार कंपनियों के साथ बातचीत की। इस दौरान उन्‍होंने नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता पर जोर दिया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मंत्री भूपेंद्र यादव ने विशिष्ट समस्या विवरण प्रस्तुत किए और वायु प्रदूषण प्रबंधन के नौ प्रमुख क्षेत्रों को कवर करते हुए समाधान मांगे।

उन्होंने स्टार्टअप्स के साथ इस बात पर चर्चा की कि उनकी प्रौद्योगिकियों को जमीनी स्तर पर कैसे अनुकूलित, विस्तारित और लागू किया जा सकता है।

मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि बातचीत का उद्देश्य ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और वायु गुणवत्ता निगरानी को मजबूत करने जैसे चल रहे उपायों को स्रोत-स्तर के तकनीकी हस्तक्षेपों के साथ पूरक बनाना है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की सहभागिता नीति कार्यान्वयन में अधिक एकरूपता लाने और शासन में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक हो सकती है। उन्होंने प्रौद्योगिकी-आधारित प्रवर्तन को अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अनियमितताओं की पहचान करने के लिए संयंत्र संचालन डेटा के साथ ओसीईएमएस डेटा का एकीकरण आवश्यक है, और इस उद्देश्य को प्राप्त करने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने शहरव्यापी वायु गुणवत्ता निगरानी के महत्व पर बल दिया और स्वच्छ वाहनों और सुगम यातायात प्रबंधन का आह्वान किया, जिसमें छेड़छाड़-रहित पीयूसी निगरानी और एआई-आधारित यातायात जाम के प्रमुख क्षेत्रों का पूर्वानुमान शामिल है।

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स को फसल अवशेष, ठोस अपशिष्ट और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए पर्यावरण-अनुकूल समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कृषि मंत्रालय, सीएक्यूएम और सीपीसीबी को शामिल करते हुए फसल अवशेषों के भंडारण के लिए दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर भी बल दिया, साथ ही फसल अवशेषों के भंडारण के लिए एक इन-सीटू मॉडल विकसित करने की बात कही। उन्होंने सड़क पर धूल के सक्रिय नियंत्रण के लिए एक अहम उपाय के रूप में सड़कों के रखरखाव को तेज और अधिक कुशल बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस वार्ता का मुख्य फोकस वायु प्रदूषण की वास्तविक समय की समझ की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर, रिमोट सेंसिंग, उपग्रह और ड्रोन आधारित प्रौद्योगिकियों और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग पर था।

उन्होंने बताया कि स्टार्टअप्स द्वारा प्रस्तुत समाधानों में स्थानीय वायु गुणवत्ता निगरानी, ​​शहरव्यापी प्रदूषण मानचित्रण, हॉटस्पॉट पहचान और पूर्वानुमान, एआई-आधारित स्रोत निर्धारण, प्रदूषण स्रोतों की वास्तविक समय पहचान और यातायात जाम प्रबंधन का पूर्वानुमान शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि पराली और खुले में बायोमास जलाने का 24 घंटे पता लगाने के साथ-साथ वैध पीयूसी प्रमाणपत्र के बिना वाहनों और पुराने वाहनों की स्वचालित पहचान के लिए प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया, जिससे समय पर प्रवर्तन और हस्तक्षेप को मजबूत किया जा सकता है।

मंत्री ने वायु प्रदूषण के अपशिष्ट और अवशेष संबंधी पहलुओं से निपटने के उपायों पर भी चर्चा की।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम