मध्य पूर्व युद्ध से चीन का निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित, गोदामों में अटका सामान
नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व संघर्ष का असर चीन पर भी होता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जारी युद्ध का असर चीन के निर्यात पर पड़ा है। शिपिंग में आई रुकावट से स्थानीय गोदामों में सामान का ढेर लग गया है।
सीबीसी न्यूज के अनुसार चीनी शहर यिवू, जिसे दुनिया का सुपरमार्केट कहा जाता है क्योंकि यह घरेलू सामान और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जो अमेजन और वॉलमार्ट जैसे अमेरिकी वाणिज्य दिग्गजों के साथ-साथ मध्य पूर्व के देशों को भी सामान भेजता है।
क्रिस ब्राउन की रिपोर्ट में बताया गया है कि शिपिंग लागत में तेजी से वृद्धि और ईरान युद्ध के कारण वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरे के चलते, आयातक चीनी माल नहीं उठा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप गोदामों में सामान जमा हो रहा है। स्थानीय व्यवसायी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि शिपिंग लागत 1,200 डॉलर प्रति कंटेनर से बढ़कर 6 हजार डॉलर हो गई है।
उच्च शिपिंग लागत के अलावा, कुछ आयातक माल परिवहन का जोखिम नहीं लेना चाहते, क्योंकि मध्य-पूर्व युद्ध के दौरान व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों को देखते हुए इसे सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। मंगलवार को फारस की खाड़ी में एक और तेल टैंकर पर हमला हुआ, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि उनके डर बेबुनियाद नहीं हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वी चीन का यह शहर यह समझने में मदद करता है कि ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को कैसे प्रभावित कर रही है।
रिपोर्ट में कुछ स्थानीय व्यवसायियों के हवाले से कहा गया है कि मध्य पूर्व इस चीनी शहर के निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत उपभोग करता है।
युद्ध के कारण निर्यात प्रभावित होने के अलावा, चीन ऊर्जा के मोर्चे पर भी प्रभावित हुआ है, क्योंकि यह ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
इसी तरह, चीन की ओर से आयात की जाने वाली बहुत सारी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) कतर से आती है। मध्य पूर्व का यह देश अपनी गैस सुविधाओं पर हवाई हमलों के कारण कुछ संचालन बंद कर चुका है, और इससे आपूर्ति बाधित हुई है।
--आईएएनएस
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