मध्य प्रदेश में मिड-डे मील विवाद : कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा, जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की
मैहर, 27 जनवरी (आईएएनएस)। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के मैहर जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को थाली की बजाय कागज और पुरानी नोटबुक के फटे पन्नों पर दोपहर का भोजन परोसे जाने का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विपक्षी कांग्रेस ने मंगलवार को राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला और मिड-डे मील योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मैहर की घटना ने मिड-डे मील को लेकर भाजपा सरकार के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए घटना को “मध्य प्रदेश में व्यवस्था, शासन और मानवीय करुणा की विफलता का प्रतीक” करार दिया।
पटवारी ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों के सम्मान और अधिकारों के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
श्योपुर जिले में पहले सामने आई इसी तरह की एक घटना का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल बच्चों का अपमान हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और संविधान की मूल भावना का भी अपमान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कागजों में योजनाओं की सफलता के दावे करती है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में लगभग 10 लाख बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें से करीब 1.36 लाख बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित श्रेणी में आते हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े राज्य में व्यापक कुपोषण की पुष्टि करते हैं और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट भी मध्य प्रदेश में पोषण आहार से जुड़े घोटाले की स्पष्ट पुष्टि कर चुकी है, इसके बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हो रहा है।
गौरतलब है कि यह विवाद उस समय सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें स्कूली बच्चे फर्श पर बैठे हुए और पुरानी नोटबुक व किताबों के फटे पन्नों पर परोसे गए हलवा-पूरी को खाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो के सामने आने के बाद आम लोगों और राजनीतिक दलों में आक्रोश देखा गया।
मामले को लेकर बढ़ती आलोचनाओं के बीच जिला प्रशासन ने मंगलवार को जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की। जिला प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) विष्णु त्रिपाठी से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकारी हाई स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुनील कुमार त्रिपाठी को निलंबित करने का प्रस्ताव रीवा आयुक्त को भेजा गया है। इसके साथ ही संविदा कर्मचारी बीआरसी प्रदीप सिंह के वेतन में एक माह की कटौती करने का निर्णय लिया गया है।
--आईएएनएस
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