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मेघालय की 151 करोड़ रुपए की शिलांग पीक रोपवे परियोजना से बढ़ेगा पर्यटन, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य

 

शिलांग, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। मेघालय की प्रस्तावित 151 करोड़ रुपए की शिलांग पीक रोपवे परियोजना से पर्यटकों की इस लोकप्रिय दर्शनीय स्थल तक पहुंच में सुधार होने, मौजूदा सड़कों पर दबाव कम होने और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

सरकार ने शुक्रवार को अधिकारियों के हवाले से बताया कि इस परियोजना को 14 अक्टूबर, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

मेघालय रोपवे विकास प्राधिकरण (एमआरडीए) द्वारा कार्यान्वित की जा रही यह परियोजना 913 मीटर लंबी होगी और इसमें 11 यात्री केबिनों के साथ दो अतिरिक्त केबिन भी होंगे।

पर्यटन विभाग ने राज्य सम्मेलन केंद्र में आयोजित ब्रीफिंग के दौरान परियोजना की विशेषताओं, प्रस्तावित पर्यावरण सुरक्षा उपायों और सामुदायिक भागीदारी उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

शिलांग पीक पर लंबे समय से चली आ रही आवागमन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए रोपवे की योजना बनाई जा रही है। शिलांग पीक पर पर्यटक पारंपरिक रूप से रक्षा नियंत्रण वाले क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले रास्तों पर निर्भर रहे हैं, जिन पर सुरक्षा प्रतिबंध लागू होते हैं।

सरकारी प्रस्तुति के अनुसार, आवागमन को बेहतर बनाने के प्रयास 2012 में मदन लाबान और अपर लुम्पारिंग से पैदल मार्गों के विकास के साथ शुरू हुए थे। हालांकि, खड़ी ढलान के कारण इन मार्गों तक पहुंचना मुश्किल था, जिसके चलते सरकार ने 2019 में रोपवे परियोजना पर विचार करना शुरू किया।

इस परियोजना के लिए 80.89 करोड़ रुपए का अनुदान न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) द्वारा और 70.11 करोड़ रुपए का अनुदान प्रधानमंत्री की उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास पहल (पीएम-देवाइन) के तहत उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के माध्यम से दिया जा रहा है।

प्रस्तावित ऊपरी टर्मिनल शिलांग पीक व्यूप्वाइंट से लगभग 80 मीटर नीचे स्थित होगा, ताकि मनोरम दृश्य संरक्षित रहें और वायुसेना की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान हो सके।

निचला टर्मिनल मदन लाबान स्थित एक सरकारी वन नर्सरी में बनाने की योजना है, जिसके बारे में अधिकारियों ने कहा कि आकलन के अनुसार जल संग्रहण क्षेत्रों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जंगलों, जल स्रोतों और आसपास के भूदृश्य को लेकर चिंताओं को दूर करते हुए अधिकारियों ने कहा कि रोपवे का मार्ग एक पहाड़ी श्रृंखला के अनुदिश होगा और पर्यावरण आकलन में जल संग्रहण क्षेत्रों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पाया गया है।

सरकार ने कहा कि टावर उमिव जल संग्रहण क्षेत्र और मावफलांग बांध क्षेत्र से बाहर स्थित होंगे, जिससे किसी भी जल स्रोत के प्रभावित होने की उम्मीद नहीं है। प्रस्तुति के अनुसार, लुम शिलांग का पवित्र स्थल प्रस्तावित मार्ग से 3.15 किमी दूर स्थित है।

अधिकारियों ने बताया कि केबल और केबिन पेड़ों की छतरी के ऊपर से गुजरेंगे, जिससे पेड़ों की कटाई केवल छह टावर स्थानों और दो टर्मिनल स्टेशनों तक सीमित रहेगी। व्यूप्वाइंट तक वाहनों की आवाजाही कम होने से भीड़भाड़ और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिल सकती है।

एनडीबी की आवश्यकताओं के अनुसार एक पर्यावरण प्रभाव अध्ययन किया गया है, और परियोजना लागू पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और वैधानिक प्रावधानों का पालन करेगी।

इस ब्रीफिंग की सह-अध्यक्षता एमआरडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पर्यटन विभाग के आयुक्त और सचिव ने की। अधिकारियों ने बताया कि रियात लाबान डोरबार पिल्लुन सहित स्थानीय हितधारकों के साथ परामर्श और स्थल निरीक्षण किए गए हैं।

इस परियोजना से पर्यटन, आतिथ्य, परिवहन और खुदरा क्षेत्र में 450 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने स्पष्टीकरणों का स्वागत किया, लेकिन कहा कि आगे विचार-विमर्श करने से पहले उन्हें जानकारी की जांच करने के लिए समय चाहिए।

सरकार ने हितधारकों से परियोजना में सहयोग करने का आग्रह किया और पर्यटन अवसंरचना में सुधार और स्थानीय आजीविका को समर्थन देने की इसकी क्षमता पर प्रकाश डाला।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी