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मैकडॉनल्ड्स इंडिया संचालक वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड को दूसरी तिमाही में 2.7 करोड़ रुपए का हुआ घाटा

 

मुंबई, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। मैकडॉनल्ड्स के पश्चिमी और दक्षिणी भारत के कारोबार का संचालन करने वाली वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड लिमिटेड को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 2.7 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले वित्त वर्ष 2026 की इसी तिमाही में कंपनी ने 37 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। इस तरह कंपनी लाभ से घाटे में पहुंच गई है। हालांकि कंपनी की आय में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई।

स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, सितंबर तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व 16.4 प्रतिशत बढ़कर 747 करोड़ रुपए हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में 642 करोड़ रुपए था।

कंपनी का परिचालन प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत रहा। ईबीआईटीडीए सालाना आधार पर 39.2 प्रतिशत बढ़कर 94 करोड़ रुपए पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह 67.3 करोड़ रुपए था। इसी दौरान ईबीआईटीडीए मार्जिन 10.5 प्रतिशत से बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो गया।

कंपनी ने बताया कि बेहतर परिचालन, दक्षता और लागत नियंत्रण के कारण परिचालन लाभ में सुधार देखने को मिला। ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए 29 प्रतिशत बढ़कर 98.1 करोड़ रुपए रहा, जबकि ईबीआईटीडीए मार्जिन बढ़कर 13.1 प्रतिशत पर पहुंच गया। कंपनी का कैश पीएटी 52.6 करोड़ रुपए रहा, जो 7 प्रतिशत के स्वस्थ मार्जिन को दर्शाता है।

तिमाही के दौरान कंपनी ने अपने नेटवर्क का विस्तार भी जारी रखा। वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड ने 11 नए रेस्तरां जोड़े, जिसके बाद उसके कुल आउटलेट्स की संख्या बढ़कर 80 शहरों में 492 हो गई है। कंपनी का फोकस मौजूदा और उभरते बाजारों में अपनी पहुंच और ग्राहकों की सुविधा को बढ़ाने पर बना हुआ है।

कंपनी के चेयरमैन अमित जटिया ने कहा कि तिमाही नतीजे कंपनी की रणनीति और निष्पादन क्षमता की मजबूती को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, "ग्राहकों की संख्या में वृद्धि, बेहतर लाभप्रदता और लगातार विस्तार हमें भविष्य के बड़े अवसरों का लाभ उठाने, दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने और उद्योग में अपनी नेतृत्व स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में अच्छी स्थिति में रखते हैं।"

डिजिटल कारोबार भी कंपनी के लिए प्रमुख वृद्धि चालक बना रहा। सितंबर तिमाही में कुल बिक्री में डिजिटल चैनलों की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक रही। वहीं, मैकडॉनल्ड्स ऐप के कुल डाउनलोड 5.8 करोड़ के पार पहुंच गए, जबकि मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़कर लगभग 42 लाख हो गई।

हालांकि बढ़ते राजस्व और बेहतर परिचालन प्रदर्शन के बावजूद अंतिम लाभ में गिरावट यह संकेत देती है कि कंपनी पर अन्य वित्तीय एवं गैर-परिचालन खर्चों का दबाव बना रहा, जिसके चलते उसे तिमाही में शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा।

--आईएएनएस

डीबीपी