मथुरा की अदालत ने नाबालिग बच्ची से यौन शोषण के आरोपी को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मथुरा में पॉक्सो (पोक्सो) अधिनियम के तहत विशेष न्यायाधीश की अदालत ने नाबालिग बच्ची से यौन शोषण के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शनिवार को जानकारी दी कि अदालत ने इस मामले में दोषी पर 1.43 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
सीबीआई ने बताया कि अदालत ने आरोपी श्याम बिहारी को 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012', 'भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)' और 'सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000' के तहत विभिन्न अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 1.43 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। इन अपराधों में बलात्कार, गंभीर यौन हमला, अश्लील उद्देश्यों के लिए बच्चे का इस्तेमाल करना और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को अपने पास रखना शामिल है।
सीबीआई ने 17 जून 2025 को श्याम बिहारी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उस पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री को इकट्ठा करने, भेजने और प्रकाशित करने का आरोप था।
जांच के दौरान पता चला कि उसने एक नाबालिग बच्ची के साथ गंभीर यौन हमला भी किया था। सीबीआई ने नाबालिग पीड़िता का पता लगाया और उसकी सुरक्षा, गरिमा व मानसिक स्थिति का पूरा ध्यान रखते हुए जांच की। पीड़िता को उचित काउंसलिंग भी दी गई। इस दौरान फॉरेंसिक विशेषज्ञों, बच्चों के यौन शोषण के मामलों से जुड़े डॉक्टरों और बाल संरक्षण अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा गया। डिजिटल सबूतों को सही तरीके से इकट्ठा करने, संभालने और सुरक्षित रखने का विशेष ध्यान रखा गया।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 14 अगस्त 2025 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने 16 अक्टूबर 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए।
मुकदमे के बाद, अदालत ने आरोपी श्याम बिहारी को नाबालिग बच्ची के साथ गंभीर यौन हमला, यौन शोषण, अश्लील उद्देश्यों के लिए बच्चे का इस्तेमाल और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री रखने जैसे विभिन्न अपराधों का दोषी पाया। इन अपराधों के लिए 'पॉक्सो अधिनियम, 2012', 'आईपीसी' और 'आईटी अधिनियम, 2000' के तहत उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
एजेंसी ने कहा कि सीबीआई बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े अपराधों की जांच और उन पर मुकदमा चलाने के लिए प्रतिबद्ध है। वह ऐसे मामलों को उच्च प्राथमिकता देती है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और उनकी गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाता है।
--आईएएनएस
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