मणिपुर हिंसा के कारण जीएसटी राजस्व में 1,200 करोड़ रुपए का नुकसान: युमनाम खेमचंद सिंह
इंफाल, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार को कहा कि 3 मई, 2023 को भड़की जातीय हिंसा ने राज्य की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। हिंसा के परिणामस्वरूप 2023 से 2026 के बीच वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगभग 1,200 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है।
नागा बहुल सेनापति जिले के तादुबी स्थानीय मैदान में 'सेवा संकल्प अभियान' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक चले इस अशांति ने आर्थिक गतिविधियों और सरकारी राजस्व को बुरी तरह प्रभावित किया है।
उन्होंने सेनापति जिले के मरम, तादुबी और माओ के लोगों की सराहना की, जिन्होंने नागालैंड के दीमापुर होते हुए इंफाल को गुवाहाटी से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्री बसों और अन्य वाहनों की निर्बाध आवाजाही बहाल करने में सहयोग दिया।
उन्होंने आगे कहा कि राजमार्ग पर निर्बाध आवागमन बहाल होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है और क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क में सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बंद और नाकाबंदी से राज्य भर में दिहाड़ी मजदूरों और छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुदायों के बीच मतभेदों को संवाद और आपसी समझ के माध्यम से सुलझाया जा सकता है।
खेमचंद सिंह ने कहा कि मणिपुर में रहने वाले 36 विभिन्न समुदायों ने मणिपुर-बर्मा युद्ध के दौरान राज्य के राजाओं के साथ सहयोग किया था, और सामूहिक रूप से बर्मी सेना का प्रतिरोध करते हुए उन्हें सफलतापूर्वक खदेड़ कर राज्य की रक्षा की थी।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य की प्रगति और विकास के लिए सभी समुदायों को मिलकर एक साझा लक्ष्य की ओर काम करना चाहिए।
विकास संबंधी पहलों के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अंतर-ग्राम सड़कों (आईवीआर) के निर्माण के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के बजट में लगभग 10 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी जिलों में समान विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पिछली सरकार के कार्यकाल में चुराचंदपुर जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित किया गया था, और अब सेनापति जिले में एक और मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि मैतेई, नागा और कुकी समुदायों के सदस्य खुद को मणिपुरी के रूप में पहचानने में हिचकिचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य को शांति और सुलह के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए, लोगों को पहले खुद को भारतीय और फिर मणिपुरी के रूप में पहचानना होगा।
--आईएएनएस
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