मणिपुर में बंद से घाटी और पहाड़ी इलाकों में जनजीवन प्रभावित, हिंसा के बाद 21 गिरफ्तार
इंफाल, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। इंफाल घाटी और मणिपुर के नागा-बहुल पहाड़ी इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सोमवार को भी विभिन्न संगठनों की ओर से बुलाए गए बंद जारी रहा। इस बीच, पुलिस ने दो दिन पहले इंफाल पश्चिम जिले में एक रैली के दौरान हुई हिंसा में कथित संलिप्तता के आरोप में 21 लोगों को गिरफ्तार किया है।
आह्वान मीरा पाइबी (मशाल लेकर चलने वाली महिलाएं) ने इंफाल घाटी में बंद का एलान किया था। जिसमें पांच से छह जिले शामिल हैं। यह महिलाओं के सबसे प्रभावशाली संगठनों में से एक है और इसने विभिन्न नागरिक समाज संगठनों के साथ मिलकर यह आह्वान किया।
बिष्णुपुर जिले में 7 अप्रैल को दो नाबालिग बच्चों की हत्या और उनकी मां के घायल होने के खिलाफ विरोध किया जा रहा है। आरोप है कि यह घटना संदिग्ध कुकी उग्रवादियों की ओर से की गई थी। शनिवार आधी रात से लागू बंद की वजह से घाटी में रोजमर्रा के जीवन को लगभग पूरी तरह से ठप कर दिया गया है।
कई जगहों पर मीरा पाइबी की सदस्य और महिला प्रदर्शनकारियों के समूह सड़कों को रोकते और वाहनों की आवाजाही को प्रतिबंधित करते देखे गए। पुलिस के अनुसार, यात्री और व्यावसायिक वाहन सड़कों से नदारद रहे, जबकि दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और सड़क किनारे के विक्रेता बंद रहे, जिससे हर तरफ भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ।
पहाड़ी क्षेत्रों में, यूनाइटेड नागा काउंसिल (जो मणिपुर में नागा समुदाय का सर्वोच्च संगठन है) ने अलग से रविवार आधी रात से राज्य के सभी नागा-बहुल क्षेत्रों में तीन दिवसीय पूर्ण बंद का आह्वान किया है। यूनाइटेड नागा काउंसिल ने 18 अप्रैल को उखरुल जिले में दो नागा नागरिकों की हत्या के विरोध में इस बंद की घोषणा की। आरोप है कि यह हत्या भी संदिग्ध कुकी उग्रवादियों की ओर से की गई थी।
मणिपुर के गृह मंत्री कोंथौजम गोविंददास ने रविवार को नागरिक समाज संगठनों और आम जनता से अपील की कि वे जन कल्याण और राज्य के सामान्य कामकाज के हित में इन बंदों पर पुनर्विचार करें और उन्हें वापस ले लें। इस बीच, पुलिस ने बताया कि दो दिन पहले इंफाल पश्चिम जिले में एक रैली के दौरान हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में कम से कम 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के एक बयान के अनुसार, 18 अप्रैल को इंफाल-जिरीबाम सड़क पर एक मशाल रैली निकाली गई थी, जिसका आयोजन पटसोई से सगोलबंद तक विभिन्न (नागरिक समाज संगठनों) की ओर से किया गया था।
रैली के दौरान, कथित तौर पर भीड़ हिंसक हो गई और उसने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया, पेट्रोल बम फेंके, तथा गुलेल और बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग घायल हो गए। सुरक्षा बलों के सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई, और सीआरपीएफ की 232वीं बटालियन के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने बताया कि अंततः भीड़ को तितर-बितर किया गया और स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।
इस बीच, मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार 18 अप्रैल को उखरुल जिले में हुई गोलीबारी की घटना और 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले में हुए जानलेवा बम हमले, दोनों की गहन और विस्तृत जांच के लिए इन मामलों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप देगी।
--आईएएनएस
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