कर्नाटक: कोलार में आम उत्पादकों ने कीमतों को लेकर किया बंद, कुमारस्वामी ने केंद्र से मदद का किया वादा
बेंगलुरु/कोलार (कर्नाटक), 22 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक के कोलार जिले में आम उत्पादकों ने सोमवार को जिले भर में बंद का आयोजन किया। वे मांग कर रहे थे कि बाजार में आम के दाम तेजी से गिरने के बीच सरकार आम के लिए लाभकारी समर्थन मूल्य की घोषणा करे।
इस बीच, भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखेगी।
आम उत्पादक संघ और कई अन्य संगठनों के नेतृत्व में किसानों ने पूरे जिले में विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि आम की मौजूदा बाजार कीमत के कारण किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
प्रदर्शनकारी किसानों के अनुसार, बाजार में आम की कीमत अभी केवल 3,000 से 4,000 रुपए प्रति टन मिल रही है, जो उत्पादन लागत से बहुत कम है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,000 से 10,000 रुपए प्रति टन तय किया जाए।
जिले के कई हिस्सों, जिनमें कोलार और श्रीनिवासपुर तालुक शामिल हैं, में सुबह-सुबह ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने कम कीमतों पर अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए सड़कें जाम कर दीं और सड़कों पर आम फेंक दिए।
इस बंद से जिले के कुछ हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और कुछ इलाकों में आरटीसी (आरटीसी) बस सेवाएं बंद रहीं। श्रीनिवासपुर शहर में लगभग पूरी तरह से बंद जैसी स्थिति रही, क्योंकि आंदोलन के समर्थन में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।
किसानों ने कहा कि उन्हें पिछले सीजन में भी इसी तरह का नुकसान हुआ था और आरोप लगाया कि बाजार में सरकार के दखल न देने के कारण इस साल भी वही स्थिति पैदा हो गई है।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य और केंद्र सरकार से आम उत्पादकों की मदद करने और उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए तत्काल उपाय करने की मांग की।
आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने यह मामला पहले ही केंद्र के सामने उठा दिया है।
उन्होंने कहा, "मैंने कोलार में आम उत्पादकों की समस्याओं के बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखा है। मंत्री पिछले पांच दिनों से भोपाल में हैं। मुझे मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र को अभी तक इस मुद्दे पर कर्नाटक सरकार से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी पत्र लिखा है।"
उन्होंने कोलार और रामनगर के आम उत्पादकों से अपील की कि वे चिंता न करें और पिछले सीजन में केंद्र के दखल को याद रखें। उन्होंने कहा, "मैं कोलार और रामनगर के आम उत्पादक किसानों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि उन्हें चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। पिछली बार केंद्र सरकार ने अच्छा-खासा मुआवज़ा दिया था और इस साल भी वैसी ही मदद दी जाएगी।"
कोलार से जेडीएस के सांसद मल्लेश बाबू, जो विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर गए थे, ने कहा कि आम उत्पादक किसानों के लिए 'सपोर्ट प्राइस' (समर्थन मूल्य) तय करवाने की कोशिशें चल रही हैं।
उन्होंने कहा, "हमने सरकार से आम के लिए सपोर्ट प्राइस घोषित करने की मांग पहले ही कर दी है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और मैंने मिलकर यह मामला केंद्र सरकार के सामने उठाया है। प्रक्रिया में देरी इसलिए हुई है क्योंकि केंद्रीय कृषि मंत्री भोपाल गए हुए हैं। हमें उम्मीद है कि उनके नई दिल्ली लौटने पर सपोर्ट प्राइस के बारे में घोषणा कर दी जाएगी।"
मल्लेश बाबू ने बताया कि किसान 10 रुपए प्रति किलोग्राम के सपोर्ट प्राइस की मांग कर रहे हैं और उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा कदम उठाया जा चुका है।
उन्होंने आगे कहा, "पिछले साल भी कुमारस्वामी के दखल के बाद सपोर्ट प्राइस की घोषणा की गई थी। इस बार भी उन्होंने संबंधित मंत्री के सामने यह मुद्दा उठाया है। आंध्र प्रदेश ने आम उत्पादक किसानों के लिए पहले ही मदद के उपाय घोषित कर दिए हैं और हमें उम्मीद है कि केंद्र और कर्नाटक सरकार, दोनों ही राज्य के किसानों को वैसी ही मदद देंगी।"
--आईएएनएस
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