हनुमान बेनीवाल की टिप्पणियों पर भाजपा का हमला, मदन राठौड़ बोले- अभद्र भाषा लोकतंत्र के लिए खतरा
जयपुर, 28 मई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गुरुवार को आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा की गई टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि कुछ राजनेताओं द्वारा इस्तेमाल की जा रही भाषा अब एक अस्वीकार्य स्तर तक पहुंच गई है।
मदन राठौड़ ने आरोप लगाया कि कुछ नेता केवल सुर्खियों में बने रहने और अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए अभद्र भाषा का सहारा ले रहे हैं, जो उनके अनुसार लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक मर्यादा के लिए एक गंभीर खतरा है।
राठौड़ ने कहा, "राजनीति में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है। राजनीतिक विरोध स्वाभाविक है, लेकिन सार्वजनिक चर्चा में गरिमा और शिष्टता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।"
उन्होंने आगे कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने पद की गरिमा और अपनी भाषा के प्रति सचेत रहना चाहिए।
भाजपा नेता ने कहा कि आज की राजनीति को 'शुद्धिकरण' की आवश्यकता है, और चेतावनी दी कि इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक संस्थाओं और प्रतिनिधियों पर जनता के भरोसे को कम कर सकती है।
उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि वे उन नेताओं को हतोत्साहित करें और वैचारिक रूप से उनका विरोध करें जो अपमानजनक भाषा का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर ही राजनीतिक चर्चा को फिर से स्वस्थ मानकों पर लाया जा सकता है।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि भाषाई मर्यादा बनाए रखना और सार्वजनिक जीवन की गरिमा को बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ की गई कथित टिप्पणियों को निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।
राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय राजनीति की परंपरा हमेशा से ही शिष्ट संवाद और वैचारिक बहस की रही है, लेकिन कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए शिष्टता की सभी सीमाएं लांघ रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई कथित भाषा को दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए हानिकारक बताया।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने भी हनुमान बेनीवाल की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा अनुचित और एक सांसद के पद की गरिमा के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने पद की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दधीच ने कहा कि असहमति और विरोध लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, लेकिन व्यक्तिगत हमले और अभद्र टिप्पणियां स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करती हैं और राजनीतिक मानकों को गिराती हैं।
भाजपा के प्रदेश महासचिव श्रवण सिंह बागड़ी ने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध के नाम पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
भाजपा के एक और प्रदेश महासचिव भूपेंद्र सैनी ने कहा कि जनता ऐसी राजनीति की उम्मीद करती है जो विकास, सुशासन और जन कल्याण पर केंद्रित हो, न कि विवादों से भरे ऐसे बयानों पर जिनका मकसद सिर्फ ध्यान खींचना हो।
भाजपा महासचिव मिथिलेश गौतम ने भी इन बयानों की निंदा करते हुए इन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों और भारतीय राजनीतिक संस्कृति के विपरीत बताया।
--आईएएनएस
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