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महाराष्ट्र के राज्यपाल ने राष्ट्रीय संगोष्ठी में जेजीयू की एआई गवर्नेंस रिपोर्ट जारी की

 

मुंबई, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई में ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) की एआई गवर्नेंस रिपोर्ट 2026 जारी की।

वर्मा ने कहा, “मैं ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के सिरिल श्रॉफ सेंटर फॉर एआई, लॉ एंड रेगुलेशन को बधाई देता हूं, जहां उद्योग जगत और सार्वजनिक संस्थानों के सदस्य साझा मूल्यों की भावना के साथ एकजुट हुए हैं। इस तरह की संगोष्ठियां दिखाती हैं कि नवाचार और साझेदारी किस तरह प्रभावशाली समाधान ला सकती हैं।”

उन्होंने कहा, “आज हम शासन में एआई की बात कर रहे हैं और मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि जब हम बदलाव लाते हैं, तो उसका महत्व क्या होता है। यह शोध का युग है और हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे केवल आर्थिक दृष्टि से परिभाषित नहीं किया जा सकता। एआई बहुत सी समस्याओं का समाधान करेगा, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी आती हैं। हमें एआई का उपयोग करुणा के साथ करना होगा, अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं पहुंचाने के लिए करना होगा और जनसामान्य के उत्थान के लिए करना होगा। अपने मूल्यों को सुरक्षित रखना और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि उद्देश्यहीन तकनीक खतरनाक होती है। हमें सहानुभूति के साथ शासन देना होगा। यह अवधारणा प्राचीन वेदों से आती है, जो सभी के सुख, शांति और उत्थान की बात करते हैं। भारतीय कला, संस्कृति और विचारधाराओं को सुरक्षित रखना विशेष रूप से जरूरी है, क्योंकि यह हमारी राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा है।”

विश्वभर के उच्च शिक्षा संस्थान एआई के तेजी से बढ़ते एकीकरण और छात्रों की बदलती अपेक्षाओं के जवाब में संरचनात्मक बदलावों से गुजर रहे हैं। एआई टूल्स जटिल डेटा सेट्स के विश्लेषण, सामाजिक घटनाओं के मॉडलिंग, गुणात्मक शोध को मजबूत करने और सार्वजनिक हित में उपयोगी निष्कर्ष निकालने में सक्षम बनाते हैं। संस्थागत स्तर पर एआई को शासन व्यवस्था में इस तरह शामिल किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और साक्ष्य-आधारित निर्णय क्षमता मजबूत हो रही है।

अपने स्वागत भाषण में एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष डॉ. इंदु शाहानी ने कहा, “यह विशिष्ट सभा इस संगोष्ठी के महत्व को और बढ़ाती है और आप सभी की यात्राएं बेहद प्रेरणादायक हैं।”

राज्यपाल को संबोधित करते हुए डॉ. शाहानी ने कहा, “बहुत कम नेता ऐसे होते हैं जो शासन, रचनात्मकता और कविता को एक साथ जोड़ते हैं। मैं ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी का भी धन्यवाद करती हूं, जिसने सार्थक और रणनीतिक साझेदारियां की हैं। एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी में हम डिजाइन, प्रबंधन, तकनीक, उद्यमिता और कानून को मिलाकर भविष्य के लिए तैयार स्नातक तैयार करते हैं।”

अपने प्रारंभिक संबोधन में ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति प्रो. (डॉ.) सी. राज कुमार ने कहा, “यह रिपोर्ट एक केंद्रीय प्रश्न से प्रेरित है: जेजीयू ऐसा शिक्षा तंत्र कैसे विकसित करे, जो एआई का उपयोग सीखने, शोध और संस्थागत दक्षता को वास्तविक रूप से बढ़ाने के लिए करे, जबकि मानवीय निर्णय क्षमता, रचनात्मकता और स्वतंत्रता शैक्षणिक अनुभव के केंद्र में बनी रहे? विश्वविद्यालय को ज्ञान की अग्रिम पंक्ति में खड़ा होना चाहिए, बदलाव का निष्क्रिय दर्शक नहीं बल्कि सिद्धांतनिष्ठ निर्माता बनना चाहिए। एआई उच्च शिक्षा के समकालीन इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण विकासों में से एक है। इसका प्रभाव केवल तकनीकी उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान सृजन और संस्थागत शासन की पूरी संरचना तक फैला है। इसलिए जेजीयू के लिए एआई से जुड़ना केवल अनुकूलन का विषय नहीं, बल्कि बौद्धिक नेतृत्व और मानक जिम्मेदारी का विषय है। एआई गवर्नेंस रिपोर्ट 2026 हमारे शैक्षणिक, शोध और प्रशासनिक क्षेत्रों में एआई को शामिल करने के लिए एक स्पष्ट और भविष्य उन्मुख ढांचा प्रस्तुत करती है।”

समकालीन शोध पूरी तरह व्याख्यान-आधारित शिक्षा की तुलना में सक्रिय शिक्षण पद्धतियों का समर्थन करते हैं। डॉ. राज कुमार ने कहा, “जेजीयू को कानून, व्यवसाय, इंजीनियरिंग, सार्वजनिक नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों सहित विभिन्न विषयों में अनुभवात्मक शिक्षण को चरणबद्ध तरीके से शामिल करना चाहिए। संरचित सिमुलेशन, अंतर्विषयक कैपस्टोन परियोजनाएं और इमर्सिव लर्निंग वातावरण सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक दक्षता के बीच की दूरी कम कर सकते हैं। ऐसे सुधार जेजीयू को एजुकेशन 4.0 सिद्धांतों के अनुरूप बनाएंगे, जिससे स्नातक केवल अवधारणात्मक समझ ही नहीं, बल्कि जटिल वैश्विक चुनौतियों से जुड़े व्यावहारिक और संदर्भित कौशल भी हासिल करेंगे।”

सिरिल श्रॉफ सेंटर फॉर एआई, लॉ एंड रेगुलेशन इस विचार पर केंद्रित है कि टिकाऊ परिवर्तन केवल नीतिगत निर्देशों से संभव नहीं है, इसके लिए सांस्कृतिक बदलाव जरूरी है। शासन संरचनाओं और संस्थागत पहचान के भीतर डिजिटल परिवर्तन को शामिल कर जेजीयू क्रमिक बदलाव से आगे बढ़कर उच्च शिक्षा सुधार में सक्रिय नेतृत्व की ओर बढ़ सकता है। ऐसी संस्कृति शिक्षकों और छात्रों को तकनीक को केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि ज्ञान सृजन के नए माध्यम के रूप में देखने के लिए प्रेरित करती है। इससे विश्वविद्यालय की क्षमता भी मजबूत होती है, जिससे वह वैश्विक शैक्षणिक और तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप तेजी से प्रतिक्रिया दे सके।

रिपोर्ट लॉन्च समारोह में अन्य प्रमुख अतिथियों में सिरिल अमरचंद मंगलदास के मैनेजिंग पार्टनर सिरिल श्रॉफ और अपग्रेड के सह-संस्थापक एवं चेयरमैन रॉनी स्क्रूवाला शामिल थे।

इस दौरान यह भी चर्चा हुई कि ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी, डिजिटल ट्विन्स और एआई-सक्षम ट्यूटरिंग सिस्टम जैसी इमर्सिव तकनीकें उच्च शिक्षा का अगला बड़ा चरण हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों को ऐसी तकनीकों को उन चुनिंदा कार्यक्रमों में चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहिए, जहां अनुभवात्मक शिक्षा का अधिक महत्व है। इसके क्रियान्वयन में लागत-प्रभावशीलता, पहुंच, समावेशिता और सीखने के मापनीय प्रभाव को आधार बनाया जाना चाहिए। तकनीकी प्रदाताओं और वैश्विक संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारियां ज्ञान हस्तांतरण और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को अपनाने में तेजी ला सकती हैं।

रिपोर्ट लॉन्च के बाद ‘गवर्निंग एआई: लॉ, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी इन द डिजिटल एज’ विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें पारिधि अडानी (पार्टनर, हेड-अहमदाबाद, सिरिल अमरचंद मंगलदास), गौरव बंसल (फाउंडर एवं प्रिंसिपल काउंसिल, इक्विलिब्रिया लॉ चैंबर्स), अधीश नरगोलकर (पार्टनर, खेतान एंड कंपनी), अपराजिता राणा (पार्टनर, एज़ेडबी एंड पार्टनर्स), ऋचा रॉय (पार्टनर, सिरिल अमरचंद मंगलदास), अनुश्री साहा (जनरल काउंसिल एवं कंपनी सेक्रेटरी, क्योर.एआई), सिद्धार्थ शाहानी (एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी) शामिल हुए। इसका संचालन प्रो. (डॉ.) सी. राज कुमार ने किया।

--आईएएनएस

डीएससी